बरगद के पत्ते चढ़ाने की मनाही

मां लक्ष्मी, गणपति और विष्णु भगवान को भूलकर न चढ़ाए ये पत्ता

भगवान गणपति और विष्णु, मां लक्ष्मी को बरगद का पत्ता नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि यह वैराग्य का प्रतीक है, जबकि उन्हें सात्विकता प्रिय है।

By : हेमा गुप्ता
मां लक्ष्मी, गणपति और विष्णु भगवान को भूलकर न चढ़ाए ये पत्ता

मां लक्ष्मी, गणपति और विष्णु भगवान को भूलकर न चढ़ाए ये पत्ता

भगवान गणपति और विष्णु भगवान, मां लक्ष्मी को बरगद का पत्ता भूलकर भी नहीं चढ़ाना चाहिए। वैसे तो ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरगद का वृक्ष बेहद पवित्र माना जाता है, लेकिन इसके पत्तों को हर देवी-देवता की पूजा में चढ़ाना शुभ नहीं होता। इन देवी-देवताओं में मां लक्ष्मी - भगवान विष्णु और गणपति बप्पा शामिल हैं।

बरगद का वृक्ष की होती है पूजा

हिंदु धर्म में बरगद के वृक्ष की पूजा की जाती है। उसके पत्ते भी काफी शुभ माने जाते हैं। धर्मशास्त्रों में बरगद को दीर्घायु, स्थिरता और तपस्या का प्रतीक माना गया है। इस वृक्ष में त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और शिव) का वास बताया जाता है। वट सावित्री व्रत में इसकी पूजा का विशेष महत्व है। फिर भी कुछ देवी-देवताओं को बरगद के पत्ते चढ़ाने की मनाही है। 

मां लक्ष्मी की पूजा में न करें इस्तेमाल

मां लक्ष्मी धन, वैभव और समृद्धि की देवी हैं। उनका स्वभाव चंचल माना जाता है, जबकि बरगद स्थायित्व और वैराग्य का प्रतीक है। इसलिए लक्ष्मी पूजा में बरगद के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते। लक्ष्मी जी को प्रिय हैं – कमल का फूल, गुलाब, शंख और सुगंधित पुष्प। दीपावली पूजा में इनका विशेष उपयोग किया जाता है।

भगवान विष्णु को नहीं चढ़ाएं बरगद पत्ता

भगवान विष्णु को तुलसी दल सबसे प्रिय है। तुलसी भक्ति और सात्विकता का प्रतीक है, वहीं बरगद वैराग्य और तपस्या से जुड़ा है। विष्णु पूजा में तुलसी का महत्व सर्वोपरि है, इस कारण बरगद के पत्तों का उपयोग वर्जित माना गया है।

गणेश जी की पूजा में भी सावधानी

भगवान गणेश विघ्नहर्ता और बुद्धिदाता हैं। उनकी पूजा में दूर्वा घास, मोदक और लाल फूलों का विशेष महत्व है। बरगद का पत्ता वैराग्य का प्रतीक होने के कारण गणेश पूजा में नहीं चढ़ाया जाता। इससे गणपति की शीघ्र प्रसन्नता में बाधा आ सकती है।

ज्योतिषीय सलाह- नियमित पूजा या किसी विशेष व्रत-अनुष्ठान के दौरान इन नियमों का पालन करने से देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूजा में हमेशा देवता की प्रिय वस्तुओं का ही उपयोग करें।यह जानकारी ज्योतिष और पारंपरिक धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है।


Note - The information in this article is based on traditional beliefs and scriptures, It is meant only for general awarenes, We do not claim authenticity of any personal faith or ritual.


 

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