सुप्रीम कोर्ट ने SIR को वैध ठहराया

सुप्रीम कोर्ट बोला - SIR अवैध नहीं, केंद्र सरकार को दिए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए सभी चुनौतीपूर्ण याचिकाओं को खारिज कर दिया, जो बिहार चुनाव से पहले दायर की गई थीं।

सुप्रीम कोर्ट बोला - SIR अवैध नहीं, केंद्र सरकार को दिए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने SIR को वैध ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार दिया। इसके साथ ही CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के विशेष पुरीक्षण यानी SIR नोटिफिकेशन को लेकर चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान SC ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को SIR के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है। अदालत ने यह भी माना कि विशेष परिस्थितियों में अलग प्रक्रिया अपनाना संविधान और कानून का अपमान नहीं है। 

केंद्र सरकार को निर्देश

SC ने चुनाव आयोग को संदिग्ध नागरिकता के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाए गए व्यक्तियों के नाम 4 हफ्ते में केंद्र सरकार को भेजने का निर्देश भी दिया है। चुनाव आयोग ने 11 महीने पहले बिहार विधानसभा चुनाव से SIR की शुरुआत की थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी में SIR कराया गया। असम में स्पेशल रिवीजन हुआ था। इन प्रदेशों में करीब 2.65 करोड़ वोटर के नाम कटे थे। सबसे पहले बिहार SIR का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। इस प्रक्रिया के खिलाफ इन प्रदेशों से कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। 

10 महीने तक सुनवाई 

कोर्ट में इस मामले में अलग-अलग याचिकाओं पर 10 महीने तक लगातार सुनवाई हुई। SC ने कहा कि दलीलें सुनने के बाद 5 सवाल सामने आए, जिन पर आदेश दिया जा रहा है। निर्वाचन आयोग ने 30 सितंबर 2025 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की। बाद में कोर्ट के निर्देश पर हटाए गए वोटर्स की सूची और कारण भी सार्वजनिक किए गए थे। चुनाव आयोग ने बिहार में SIR की फाइनल लिस्ट 1 अक्टूबर 2025 को जारी की थी। इसके बाद बिहार में वोटर्स की संख्या 6% घटकर 7.42 करोड़ हो गई थी। फाइनल लिस्ट से 69.29 लाख नाम कटे। 21.53 लाख नए नामों को जोड़ा गया।

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