इस देश ने हटाए नोटों से 4 जीरो, अब 10,000 रियल हुआ सिर्फ 1 रूपए, जानिए क्यों?
न्यूज़11 भारत रांची/डेस्क: अगर आप सोच रहे है कि पैकेट दूध या सब्जी खरीदने के लिए थैले भरकर नोट ले जाना पड़ेगा, तो यह ईरान की पुरानी हकीकत रही हैं. वहां महंगाई इतनी बढ़ गई थी कि लोग रोजमर्रा की छोटी चीजों के लिए भी लाखों-करोड़ों में भुगतान कर रहे थे. इसी समस्या को हल करने के लिए ईरान सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया हैं. ईरान ने अपनी करेंसी ‘रियाल’ से चार जीरों हटाने का फैसला किया हैं. इसका मतलब साफ है अब जो नोट 10,000 रियाल का है, वही नोट 1 रियाल के बराबर माना जाएगा. इससे अब लेन-देन और हिसाब-किताब करना आसान हो जाएगा.
मुद्दे की वजह महंगाई के कारण रियाल की कीमत बहुत कम हो गई थी. लोग 10,000 या 1,00,000 के नोट लेकर भी छोटी-छोटी चीजें खरीद रहे थे. इससे आर्थिक लेन-देन में परेशानी और नोटों की मोटी-गड्डियां ले जाने की समस्या बढ़ गई थी. सरकार ने इस कदम से नोटों को फिर से ‘इज्जत’ दिलाने और रोज़मर्रा के लेन-देन को आसान बनाने का लक्ष्य रखा हैं.
पुराने नोट भी रहेंगे वैध सरकार ने इसे झटके में लागू नहीं किया हैं. पुराने नोटों को बदलने और नए नोट चलाने के लिए 3 साल का समय दिया गया हैं. इस दौरान पुराने और नए दोनों तरह के नोट इस्तेमाल किए जा सकेंगे. बैंक धीरे-धीरे पुराने नोट वापस लेकर नए नोट जारी करेंगे.
क्या इससे महंगाई कम होगी? इस सवाल का जवाब है नहीं. सिर्फ नोटों पर लिखी संख्या कम होगी, लेकिन सामान की कीमत और खरीदने की ताकत वैसी की वैसी रहेगी. उदाहरण के लिए, अगर आपकी तनख्वाह 20 लाख रियाल थी और 1 किलो चीनी 20,000 रियाल में आती थी, तो पुराने हिसाब से आप 100 किलो चीनी खरीद सकते थे. नए नोटों के हिसाब से भी वही खरीदने की क्षमता रहेगी, बस नोटों पर संख्या छोटी दिखेगी.
कौन सा देश पहले कर चुका है ऐसा? ईरान पहला देश नहीं है जिसने ऐसा कदम उठाया हो. इससे पहले वेनेजुएला ने अक्टूबर 2021 में अपने नोटों से 6 ज़ीरो हटा चुके हैं. ईरान का यह कदम केवल लेन-देन आसान बनाने के लिए है, महंगाई पर असर डालने के लिए नहीं.
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