Filmmaker Vikram Bhatt, in a recent interview, sha

विक्रम भट्ट ने जेल में बिताए पलों को याद करते हुए कहा -'वहां मुझे असली दोस्ती का मतलब समझ आया'

विक्रम भट्ट ने जेल में बिताए पलों को याद करते हुए कहा -'वहां मुझे असली दोस्ती का मतलब समझ आया'

Vikram Bhatt Share Jail Experience: फिल्ममेकर विक्रम भट्ट ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कथित धोखाधड़ी के आरोप में उदयपुर जेल में बिताए 70 दिनों को याद करते हुए उन्होंने जेल का अनुभव शेयर किया। 

बता दें कि,  विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी पर 30 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था और वो 70 दिनों तक जेल में रहें।

विक्रम भट्ट ने किए कई खुलासे

एक इंटरव्यू के दौरान विक्रम भट्ट ने कहा कि- 'जेल में उनका समय बहुत मुश्किल था, लेकिन वहां उन्हें अपने साथी कैदियों से उम्मीद से ज्यादा सपोर्ट मिला। वहां मुझे असली दोस्ती का मतलब समझ आया. लोग मेरा बहुत ख्याल रखते थे. मुझे कोई काम नहीं करने देते थे. मेरे लिए खाना लेकर आते थे, कपड़ों का ध्यान रखते थे. जेल के कैदी मुझे प्यार से 'भीष्म पितामह' कहकर बुलाते थे. हर रात दर्जनों कैदी उनके आसपास बैठ जाते थे और उनसे डरावनी कहानियां सुनाने की जिद करते थे।'

फिल्ममेकर ने आगे बताया कि- कैदी उन्हें 'भीष्म पितामह'  कहकर बुलाते थे। 

तबीयत खराब होने पर कैदियों और पुलिस ने की मदद

विक्रम भट्ट ने बताया कि- 'जब मेरी तबीयत खराब थी तब भी जेल स्टाफ और पुलिसकर्मियों ने मेरा साथ दिया। कई लोग ऐसे थे जिनसे मैंने दया की उम्मीद नहीं की थी, लेकिन वही सबसे ज्यादा मददगार साबित हुए। कुछ कैदी तो मेरी सुरक्षा के लिए हमेशा उनके आसपास सोते थे, ताकि उन्हें कोई नुकसान न पहुंचा सके। ये वही भारत है जो हमारी फिल्में देखता है। जेल में रहकर मुझे दोबारा उन लोगों को समझने का मौका मिला. मैं जान पाया कि वो क्या सोचते हैं, किन बातों पर विश्वास करते हैं और फिल्मों को किस नजर से देखते हैं।'

फिल्ममेकर ने आगे कहा कि-

'दिसंबर-जनवरी का महीना था और बहुत ठंड पड़ रही थी। मैं जिस करवट सोता, उसी तरफ की हिप बोन में दर्द होने लगता। दूसरी करवट लेता तो वहां दर्द शुरू हो जाता। मेरी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। मुझे लगा था कि मैं वहीं मर जाऊंगा और मुझे पीलिया हो गया था। मैं ऑफिसर्स से अस्पताल ले जाने की गुहार लगाता रहा। रात में मुझे तेज बुखार आता था। मेरे साथ रहने वाले कैदी अपने कंबल मुझे दे देते थे। लेकिन फिर भी मैं ठंड से कांपता रहता था।'

हॉस्पिटल ले जाने में की देरी 

भट्ट ने दावा किया कि-  'जेल प्रशासन अगले दिन अस्पताल ले जाने की बात करते थे, लेकिन नहीं ले गए. इसके बाद मैंने तैलीय खाना पूरी तरह छोड़ दिया। सिर्फ चना, फल और पानी पर रहा। धीरे-धीरे मेरी तबीयत सुधरने लगी। इस बीच मैंने खूब प्रार्थना की और भगवान के और करीब आ गया।'

इन सेलेब्स ने पूछा था विक्रम भट्ट का हाल

उन्होंने बताया कि- 'जब फिल्ममेकर जेल से रिहा हुए तो उनके पास कुछ लोगों के कॉल आएं।  भट्ट ने बताया कि- मिथुन चक्रवर्ती और संजय दत्त ने उनका हालचाल पूछा। लेकिन संजय दत्त का फोन उनके लिए खास था क्योंकि उन्होंने कभी साथ काम नहीं किया था।'

जब उनसे पूछा गया कि- क्या अक्षय कुमार ने भी संपर्क किया? तो उन्होंने कहा कि-  'अक्षय उनके दोस्त नहीं हैं, इसलिए ऐसी उम्मीद नहीं थी।'