अमेरिका और ईरान ने वर्साय पैलेस में एक शांति समझौत

'डील साइन हो गई, जंग खत्म'... ट्रम्प के ऐलान से दुनिया को राहत, जाने समझौते की शर्ते

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फ्रांस के वर्साय पैलेस में ट्रम्प ने किए हस्ताक्षर, ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने डिजिटल साइन किए; होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और क्षेत्रीय तनाव कम करने पर सहमति

पश्चिम एशिया में बीते कई दिनों से जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच अमेरिका और ईरान ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम शांति समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौते पर दस्तखत किए, जबकि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने तेहरान से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपनी मंजूरी दी। दोनों नेताओं के हस्ताक्षर के बाद समझौते के तत्काल प्रभाव से लागू होने का दावा किया गया है। इस घटनाक्रम को पश्चिम एशिया में शांति बहाली की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

वर्साय पैलेस में हुई ऐतिहासिक डील

जानकारी के मुताबिक यह समझौता मूल रूप से 19 जून को स्विट्जरलैंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान साइन होना था, लेकिन निर्धारित तारीख से एक दिन पहले ही फ्रांस के वर्साय पैलेस में इसे अंतिम रूप दे दिया गया। ट्रम्प ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इसके कुछ समय बाद ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने भी समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर कर दिए। समझौते की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह खबर दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गई।

समझौते में किन मुद्दों पर बनी सहमति

अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस अंतरिम समझौते में युद्ध समाप्त करने, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय तनाव कम करने जैसे प्रमुख मुद्दों को शामिल किया गया है। इसके अलावा लेबनान से जुड़े संघर्षों को कम करने, तेल आपूर्ति को सामान्य बनाने और आगे की कूटनीतिक बातचीत जारी रखने पर भी सहमति बनने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक समझौते के मसौदे में कुल 14 प्रमुख बिंदु शामिल हैं, जिन पर आगे तकनीकी स्तर की वार्ताएं होंगी।

ट्रम्प बोले- अमेरिका ने अपने लक्ष्य हासिल किए

समझौते पर हस्ताक्षर के बाद ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के प्रमुख रणनीतिक उद्देश्य पूरे हो गए हैं। उनके मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना, क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था। ट्रम्प ने इसे अपनी विदेश नीति की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि अब दुनिया अधिक सुरक्षित दिशा में आगे बढ़ सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समझौते का उल्लंघन हुआ तो अमेरिका सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

ईरान ने भी समझौते को बताया महत्वपूर्ण कदम

ईरानी सरकारी एजेंसियों की ओर से जारी तस्वीरों में राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को समझौते से जुड़े दस्तावेजों के साथ देखा गया। ईरान की ओर से संकेत दिए गए हैं कि यह समझौता क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक गतिविधियों को सामान्य बनाने में मदद करेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने की स्थिति में वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

चीन ने स्वागत किया, अमेरिकी विपक्ष ने उठाए सवाल

समझौते पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सभी पक्षों से युद्धविराम और समझौते का सम्मान करने की अपील की है। वहीं अमेरिका में विपक्षी डेमोक्रेट नेताओं ने इस डील पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि समझौते में ईरान को अधिक रियायतें दी गई हैं, जबकि अमेरिका को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। कुछ नेताओं ने संभावित आर्थिक राहत और प्रतिबंधों में ढील को लेकर भी चिंता जताई है।

अब आगे क्या होगा

समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच तकनीकी और कूटनीतिक स्तर पर नई वार्ताओं का दौर शुरू होने की संभावना है। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थ भूमिका को भी इस प्रक्रिया में अहम माना जा रहा है। 19 जून को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान समझौते से जुड़े अगले चरणों पर चर्चा हो सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों देश समझौते की शर्तों का कितना पालन करते हैं और क्या यह अंतरिम व्यवस्था स्थायी शांति का रास्ता तैयार कर पाएगी।