दिल्ली की शिवाजी कॉलेज की प्रोफेसर देबस्मिता पॉल क

संपत्ति विवाद के चलते दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर की हत्या, 4 दिन बाद पश्चिम बंगाल से किरायेदार दंपती गिरफ्तार

संपत्ति विवाद के चलते दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर की हत्या, तीन दिन बाद पश्चिम बंगाल से किरायेदार दंपती गिरफ्तार

दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध शिवाजी कॉलेज की सहायक प्रोफेसर देबस्मिता पॉल की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने 4 दीं बाद, रविवार को बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, पश्चिम बंगाल में स्थित एक संपत्ति को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद ने इस सनसनीखेज हत्याकांड को जन्म दिया। मामले में एक किरायेदार दंपती को पश्चिम बंगाल के बर्दवान से गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस का दावा है कि आरोपी पति-पत्नी करीब 1,400 किलोमीटर की यात्रा कर दिल्ली पहुंचे और सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया। हत्या के तीन दिन बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

मृतका देबस्मिता पॉल

संपत्ति बेचने से इनकार करना बना हत्या की वजह

49 वर्षीय देबस्मिता पॉल पूर्वी दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित अपने फ्लैट में अकेली रहती थीं। पुलिस जांच में सामने आया है कि बर्दवान स्थित उनकी संपत्ति में रहने वाला किरायेदार दंपती लंबे समय से उस मकान को खरीदना चाहता था। हालांकि प्रोफेसर पॉल लगातार संपत्ति बेचने से इनकार कर रही थीं।

जांच के मुताबिक, आरोपी दंपती इसी मुद्दे पर बातचीत करने के बहाने दिल्ली पहुंचा। उन्होंने कथित तौर पर किराया देने का बहाना बनाया और प्रोफेसर से मुलाकात की। बातचीत के दौरान एक बार फिर संपत्ति बेचने का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन जब उन्होंने इनकार किया तो आरोपियों ने उनकी हत्या कर दी।

बहन ने देखी बॉडी, पुलिस को दी सूचना

घटना का खुलासा गुरुवार दोपहर उस समय हुआ जब देबस्मिता पॉल की बहन देवरती ने उन्हें कई बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। चिंतित होकर वह फ्लैट पहुंचीं, जहां दरवाजा बाहर से बंद मिला। किसी तरह अंदर प्रवेश करने पर उन्होंने प्रोफेसर को मृत अवस्था में पाया और तुरंत पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस, क्राइम ब्रांच और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए। शव को पोस्टमार्टम के लिए लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल भेजा गया।

प्रतीकात्मक तस्वीर

सीसीटीवी फुटेज से मिला अहम सुराग

जांच के दौरान पुलिस को फ्लैट में जबरन प्रवेश के कोई निशान नहीं मिले, जिससे संदेह हुआ कि आरोपी पीड़िता के परिचित थे। पुलिस ने लूटपाट की संभावना भी खारिज कर दी।

सीसीटीवी फुटेज की जांच में करीब 200 लोगों की गतिविधियों को खंगाला गया। इसी दौरान दो नकाबपोश लोगों की तस्वीरें सामने आईं, जो टैक्सी से आए थे। फुटेज में दोनों को लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का उपयोग करते हुए देखा गया। वे लगभग 30 मिनट तक फ्लैट में रहे और बाद में उसी वाहन से निकल गए।

प्रतीकात्मक तस्वीर

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज किया है। दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और मामले की विस्तृत जांच जारी है।