ममता के साथ हो गया खेला.. क्या बचा पाएगी पार्टी
ममता बनर्जी की हार के 14 दिन बाद ही TMC टूट गई। विधानसभा के 80 में से 58 विधायकों के बगावत के बाद लोकसभा के बागी 19 सांसदों का लेटर सामने आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसे 18 मई को लोकसभा स्पीकर को भेजा गया था और अलग गुट बनाने की मांग की गई है। इससे ये साफ है कि ममता की हार के 14 दिन बाद ही पार्टी में बगावत शुरू हो गई थी। बागियों की लिस्ट में बड़े-बड़े नाम शामिल है। यूसुफ पठान, काकोली घोष शताब्दी रॉय, जगदीश चंद्र बसुनिया, शत्रुग्न सिंहा..यहां तक की ममता की स्टार प्रचारक सायोनी घोष भी बागी हो गई है।
‘या तो मैं या अभिषेक’
इसी बीच ममता बनर्जी एक और झटका लगा। और इस झटके का नाम है कल्याण बनर्जी। वरीष्ठ नेता, सांसद कल्याण बनर्जी ने दीदी को अल्टीमेटम दे दिया है कि या तो मैं या फिर अभिषेक बनर्जी। उन्होंने ये तक कहा कि वे मेरे साथ डस्टबिन जैसा बर्ताव नहीं कर सकते. उनके पास 45 साल का अनुभव है और उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए, जैसे उन्हें किसी काम का नहीं समझा जा रहा हो. श्रीरामपुर से 4 बार के सांसद रह चुके कल्याण बनर्जी का बयान ऐसे समय आया है, जब पार्टी के भीतर पहले से ही कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी की चर्चा चल रही है.
इस्तीफों का दौर
श्रीरामपुर से 4 बार के सांसद रह चुके कल्याण बनर्जी का बयान ऐसे समय आया है, जब पार्टी के भीतर पहले से ही कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी और पार्टी छोड़ने का दौर चल रहा है। TMC के लोकसभा सांसदों के अलावा राज्यसभा सांसद भी टूट रहे हैं। पिछले 4 दिनों में चार राज्यसभा सांसद इस्तीफा दे चुके हैं। 8 जून को सुखेंदु शेखर ने सदस्यता के साथ पार्टी छोड़ी। फिर 10 जून को सुष्मिता देव अलग हो गईं। 11 जून को प्रकाश चिक और कोयल मलिक ने इस्तीफा दे दिया। टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं।
विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं। ऐसा ही चलता रहा तो ममता दीदी की पार्टी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। दीदी अकेली पड़ जाएगी।