छत्तीसगढ़ सरकार ने नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ाव

नैनो क्रांति से मेगा समृद्धि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़, कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार

छत्तीसगढ़ को देश का "धान का कटोरा" कहा जाता है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार यहां के किसान हैं। बदलते वैश्विक हालात, बढ़ती कृषि लागत और उर्वरकों की अनिश्चित आपूर्ति के बीच राज्य सरकार किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देकर नई कृषि क्रांति की शुरुआत की गई है।

50 किलोग्राम उर्वरक के बराबर प्रभावी मानी जाती

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी आधुनिक कृषि की क्रांतिकारी तकनीक के रूप में उभर रहे हैं। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि 500 मिलीलीटर की एक बोतल पारंपरिक 50 किलोग्राम उर्वरक के बराबर प्रभावी मानी जाती है। इससे किसानों की लागत कम होती है, परिवहन और भंडारण आसान होता है तथा पर्यावरण पर भी कम प्रभाव पड़ता है।

खरीफ सीजन 2026 के लिए केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक आवंटित किया गया है। वहीं राज्य में वर्तमान में 9.29 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 60 प्रतिशत है। यह सरकार की अग्रिम तैयारी और मजबूत आपूर्ति तंत्र को दर्शाता है।

पौधों की जड़ों को मजबूती मिलती

नैनो उर्वरकों के उपयोग से पौधों की जड़ों को मजबूती मिलती है, क्लोरोफिल की मात्रा बढ़ती है और उत्पादन में सुधार होता है। कृषि विभाग किसानों को इनके वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी भी दे रहा है। इससे खेती की लागत कम होने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है।

उर्वरकों की संभावित कमी और वैश्विक आपूर्ति संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने जैविक खाद, हरी खाद, एनपीके और नैनो उर्वरकों को बढ़ावा देकर टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित किया है। साथ ही कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए निगरानी समितियों और उड़नदस्ता दलों की तैनाती की गई है।

धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन, उद्यानिकी, ऑयल पाम और मखाना जैसी फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इससे छत्तीसगढ़ का कृषि क्षेत्र आधुनिक तकनीक और नवाचार के साथ समृद्धि की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।