भोपाल का आदेश बेअसर! इंदौर के इंजीनियर फिर पड़े भारी, हाईकोर्ट से मिली राहत; निगम प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
इंदौर। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी प्रतिनियुक्ति आदेशों को लेकर एक बार फिर इंदौर नगर निगम चर्चा में है। विभाग के आदेश के बावजूद नगर निगम के कुछ इंजीनियरों ने हाईकोर्ट से अंतरिम राहत हासिल कर ली है। इसके बाद निगम प्रशासन और विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
सुनवाई तक रोक लगा दी
जानकारी के अनुसार, नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 15 जून 2026 को इंदौर नगर निगम के कुछ इंजीनियरों को प्रतिनियुक्ति पर अन्य नगर निगमों में भेजने के आदेश जारी किए थे। इन आदेशों के खिलाफ नगर निगम कर्मचारी शैलेंद्र मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में तर्क दिया गया कि वे नगर निगम इंदौर के कर्मचारी हैं और उन्हें किसी अन्य निकाय में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने नोटिस जारी करते हुए ट्रांसफर आदेश के प्रभाव और संचालन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।
जवाबदेही तय करने की मांग उठी
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कुछ समय पहले भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति का मामला सामने आया था, जिसमें कई लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की खबरें सामने आई थीं। उस घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों की जवाबदेही तय करने की मांग उठी थी।
अपने वर्तमान पदों पर कार्य करते रहेंगे
सूत्रों के मुताबिक यह पहला अवसर नहीं है जब ट्रांसफर आदेश अदालत में चुनौती के बाद अटक गए हों। करीब एक वर्ष पहले भी कई इंजीनियरों के तबादलों पर न्यायालय से राहत मिल चुकी है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आदेश जारी होने के बाद संबंधित अधिकारियों को तत्काल रिलीव क्यों नहीं किया गया। वहीं यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से कोई अधिवक्ता प्रभावी रूप से पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुआ। ऐसे में निगम प्रशासन की तैयारी और मंशा दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद संबंधित इंजीनियर अपने वर्तमान पदों पर कार्य करते रहेंगे।