राज्यसभा चुनाव के बाद झारखंड में बढ़ी सियासी तल्खी, JDU विधायक सरयू राय ने CM सोरेन को दिया बड़ा सुझाव
झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। इसी बीच जेडीयू विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय ने शुक्रवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कांग्रेस से दूरी बनाने की सलाह देकर राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है।
‘कांग्रेस के साथ सरकार बेहतर नहीं चल सकती’ : सरयू राय
एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान सरयू राय ने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार को उनकी ही पार्टी के विधायकों का पूरा समर्थन नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के बीच वह एकजुटता देखने को नहीं मिली, जो पहले गठबंधन के भीतर दिखाई देती थी।
सरयू राय ने कहा कि जब तक हेमंत सोरेन कांग्रेस के साथ रहेंगे, तब तक सरकार प्रभावी ढंग से नहीं चल पाएगी। उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री को कांग्रेस से अलग होकर सरकार चलाने पर विचार करना चाहिए। राय का कहना था कि कांग्रेस और भाजपा, दोनों के समर्थन के बिना भी सरकार स्थिर रह सकती है और बेहतर तरीके से काम कर सकती है।
बहुमत को लेकर भी दिया गणित
सरयू राय ने दावा किया कि कांग्रेस के बिना भी हेमंत सोरेन सरकार के पास बहुमत जुटाने की संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जेएमएम के 34 विधायक हैं, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के 4 और भाकपा-माले के 2 विधायक पहले से गठबंधन के साथ हैं। इस तरह कांग्रेस के 16 विधायकों को अलग कर भी संख्या 40 तक पहुंचती है।
उन्होंने बताया कि वह स्वयं भी सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा जेएलकेएम नेता जयराम महतो भी समर्थन का संकेत दे चुके हैं। ऐसे में समर्थन का आंकड़ा 42 तक पहुंच सकता है। राय ने यह भी कहा कि यदि मुख्यमंत्री चाहें तो अन्य निर्दलीय या छोटे दलों के विधायकों का समर्थन भी हासिल किया जा सकता है।
आरजेडी ने क्रॉस वोटिंग के आरोपों को नकारा
राज्यसभा चुनाव में आरजेडी के पोलिंग एजेंट भोला यादव ने स्पष्ट दावा किया कि पार्टी के सभी चार विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के पक्ष में मतदान किया था। उन्होंने कहा कि मतदान के दौरान विधायकों ने नियमानुसार उन्हें अपना वोट दिखाया था, इसलिए आरजेडी पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।
भोला यादव ने कांग्रेस नेता के. राजू के बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे आरोपों से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है।
भाकपा-माले ने भी किया पलटवार
उधर, भाकपा-माले ने भी अपने विधायकों पर लगाए गए क्रॉस वोटिंग के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
पत्र में उन्होंने कहा कि पार्टी के दोनों विधायकों ने गठबंधन धर्म का पालन करते हुए कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि मतदान प्रक्रिया के दौरान अधिकृत पोलिंग एजेंटों द्वारा वोटों का सत्यापन किया गया था, जिससे क्रॉस वोटिंग के आरोप पूरी तरह तथ्यहीन साबित होते हैं।
हार के बाद गठबंधन की एकजुटता पर उठे सवाल
राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने झारखंड के सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेदों को उजागर कर दिया है। कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद सहयोगी दलों के बीच बयानबाजी का दौर जारी है, जिससे गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस राजनीतिक विवाद से कैसे निपटते हैं और गठबंधन को एकजुट रखने के लिए क्या कदम उठाते हैं।