राज्यसभा चुनाव: झारखंड में सियासत गरमाई, NDA की ‘किलेबंदी’ पर महुआ माझी ने दिया बड़ा बयान
झारखंड में राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 18 जून को होने वाले मतदान से पूर्व राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपने विधायकों को एक होटल में शिफ्ट कर दिया है। इस कदम को संभावित हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि गठबंधन की ओर से होटल की लोकेशन और व्यवस्था से जुड़ी जानकारी गोपनीय रखी गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा जोर पकड़ चुकी है।
दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले NDA द्वारा अपने विधायकों की ‘किलेबंदी’ किए जाने पर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बुधवार को तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी की राज्यसभा सांसद महुआ माझी ने इस कदम को लेकर NDA पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि गठबंधन को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं है, तो यह उसके राजनीतिक आत्मविश्वास पर सवाल खड़े करता है।
‘बीजेपी डरी हुई है’, महुआ माझी का आरोप
महुआ माझी ने कहा कि NDA द्वारा विधायकों को होटल में शिफ्ट किया जाना यह दर्शाता है कि गठबंधन को अपने विधायकों के रुख को लेकर आशंका है। उन्होंने दावा किया कि मतदान के दिन किसी तरह की अप्रत्याशित स्थिति या बहानेबाजी से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है।
JMM सांसद ने कहा, “बीजेपी डरी हुई है, इसलिए उसने अपने विधायकों को होटल में शिफ्ट कर दिया है। उन्हें लग रहा है कि मतदान के समय कोई समस्या खड़ी हो सकती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी परिस्थितियां स्वस्थ संकेत नहीं मानी जा सकतीं।”
CM हेमंत सोरेन को भी मिली थी ऐसी सलाह
महुआ माझी ने इस दौरान एक अहम खुलासा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी कुछ लोगों ने अपने विधायकों को किसी होटल या रिसॉर्ट में रखने की सलाह दी थी। हालांकि मुख्यमंत्री ने इस सुझाव को स्वीकार नहीं किया।
उनके अनुसार, हेमंत सोरेन ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है और पार्टी के सभी विधायक एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि JMM के विधायक पार्टी के निर्देशों के अनुरूप ही मतदान करेंगे और किसी अतिरिक्त व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है।
राज्यसभा चुनाव पर टिकी राजनीतिक नजरें
राज्यसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों की रणनीतियों पर सबकी नजर बनी हुई है। जहां NDA अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष प्रबंधन कर रहा है, वहीं JMM और उसके सहयोगी दल इसे विपक्ष की असुरक्षा और आंतरिक आशंकाओं से जोड़कर देख रहे हैं।
18 जून को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि झारखंड से राज्यसभा की दोनों सीटों पर किस राजनीतिक दल का पलड़ा भारी रहता है। फिलहाल चुनाव से पहले की बयानबाजी और राजनीतिक रणनीतियां राज्य की राजनीति को गर्माए हुए हैं।