मध्य प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, मध्य प्रदेश में 29 IAS अधिकारियों का तबादला, भोपाल और रीवा के कमिश्नर बदले
मध्य प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापनाओं के आदेश जारी किए हैं। इस प्रशासनिक पुनर्संरचना के तहत विभिन्न विभागों में अपर सचिव, उप सचिव और मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्तर के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
जारी आदेशों के अनुसार, प्रीति जैन को संभागीय आयुक्त कार्यालय इंदौर से स्थानांतरित कर अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन नियुक्त किया गया है। वहीं रविंद्र सिंह को अपर सचिव पद के साथ-साथ प्रभारी संचालक, मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
भोपाल और रीवा संभाग को मिले नए कमिश्नर
आदेश के मुताबिक, भोपाल संभाग के वर्तमान कमिश्नर श्री संजीव सिंह (2005) को अब सचिव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह श्री कर्मवीर शर्मा (2010), जो वर्तमान में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के आयुक्त व सचिव थे, उन्हें भोपाल संभाग का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया है।
भारती जाटव गोरे को खाद्य संपदा विभाग से स्कूल शिक्षा विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। वहीं अमरवीर सिंह हंस को ऊर्जा विकास निगम से वाणिज्य, उद्योग एवं रोजगार विभाग में पदस्थ करते हुए अपर सचिव का दर्जा दिया गया है। पी. बाला वानखेड़े को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से ऊर्जा विभाग में अपर सचिव बनाया गया है।
इसके अलावा, जबलपुर संभाग से स्थानांतरित किए गए अमर बहादुर सिंह को जनजातीय कार्य विभाग में अपर सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पवन कुमार जैन को राजस्व विभाग से सहकारिता विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। वहीं रागिनी बाटर को भी नई प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ पदस्थ किया गया है।
राज्य सरकार ने विश्व मित्र को मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) का मुख्य कार्यपालन अधिकारी नियुक्त किया है। वहीं मृणाला विक्रांत राय को स्कूल शिक्षा विभाग से पशुपालन एवं डेयरी विभाग में अपर सचिव बनाया गया है।
इसके साथ ही रेखा कन्नौजिया को उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन नियुक्त किया गया है। वहीं रविंद कुमार शाह को आयुष्मान भारत, भोपाल का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है तथा उन्हें उप सचिव का दर्जा भी प्रदान किया गया है। सरकार के इस प्रशासनिक फेरबदल को विभागीय कार्यों में तेजी और बेहतर समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।