अहिल्याबाई ने तीन शताब्दी पहले जगाई थी सांस्कृतिक चेतना की अलख: सीएम डॉ यादव
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती के अवसर पर इंदौर में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें राष्ट्र जागरण, सुशासन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की अद्वितीय प्रतीक बताया। गांधी हॉल में आयोजित ‘अहिल्या उत्सव 2026’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश जिस सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना के नए दौर का साक्षी बन रहा है, उसकी मजबूत नींव लोकमाता अहिल्याबाई ने लगभग तीन शताब्दी पहले ही रख दी थी।
सुशासन और लोककल्याण की मिसाल थीं लोकमाता
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवी अहिल्याबाई का शासन-प्रशासन रामराज्य की अवधारणा को साकार करता था। उस दौर की शक्तिशाली राजसत्ताओं के बीच उन्होंने अपनी प्रशासनिक दक्षता और दूरदर्शिता से सुशासन के नए मानक स्थापित किए। उन्होंने कहा कि लोकमाता ने केवल एक शासक के रूप में नहीं, बल्कि धर्म, समाज और संस्कृति की संरक्षक के रूप में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देशभर के मंदिरों और तीर्थस्थलों के जीर्णोद्धार के माध्यम से अहिल्याबाई ने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को नई ऊर्जा प्रदान की। उन्होंने भारतीय समाज को आत्मसम्मान के साथ जीने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।
महिला सशक्तिकरण की प्रेरणास्रोत
डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता धर्म का वास्तविक मर्म समझती थीं और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली दूरदर्शी शासक थीं। राजनीति, कूटनीति और वित्तीय प्रबंधन पर उनकी गहरी पकड़ थी। उन्होंने कहा कि महेश्वरी साड़ियां आज भी उनकी दूरदृष्टि और आर्थिक सोच की जीवंत पहचान हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय हस्तकला का गौरव बढ़ा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए ‘देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन’ संचालित कर रही है। इसके तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
न्यायमूर्तियों को मिला ‘अहिल्या गौरव सम्मान’
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत और न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी को ‘अहिल्या गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया। साथ ही फोटो प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कार प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि लोकमाता की कर्मस्थली इंदौर आज स्वच्छता, पर्यावरण और डिजिटल विकास के क्षेत्र में देशभर में नई पहचान बना रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2029 तक शहर की जल क्षमता दोगुनी हो जाएगी।
समारोह की शुरुआत 150 सदस्यीय ऑर्केस्ट्रा समूह द्वारा ‘वंदे मातरम्’ की संगीतमय प्रस्तुति से हुई, जिसने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति और श्रद्धा से ओत-प्रोत कर दिया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।