मध्य प्रदेश के रायसेन किले पर पिछले 15 दिनों से एक

रायसेन किले की पहाड़ी पर बाघ का डेरा, पर्यटक और वन विभाग की बढ़ी चिंता

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मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक रायसेन किले की पहाड़ी इन दिनों एक बाघ की मौजूदगी के कारण चर्चा में है। पिछले करीब 15 दिनों से बाघ की लगातार गतिविधियां दर्ज होने के बाद वन विभाग और स्थानीय प्रशासन हाई अलर्ट पर है। सुरक्षा के मद्देनजर किले के आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यटकों और स्थानीय लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई है।

कैमरा ट्रैप में कई बार नजर आया बाघ

वन विभाग द्वारा लगाए गए कैमरा ट्रैप में बाघ कई बार कैद हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक किले की पहाड़ी पर स्थित सोमेश्वर धाम मंदिर के पास मौजूद जलस्रोत के आसपास उसकी सबसे ज्यादा गतिविधियां रिकॉर्ड की गई हैं। कैमरों में बाघ पानी पीते और आसपास आराम करते हुए भी दिखाई दिया है।वन विभाग का मानना है कि बाघ ने फिलहाल इस क्षेत्र को अस्थायी ठिकाने के रूप में चुन रखा है और वह लगातार इसी इलाके में घूम रहा है।

सुबह की सैर पर निकले लोगों ने देखे थे पगचिह्न

कुछ दिन पहले सुबह टहलने गए लोगों को पहाड़ी पर बाघ के ताजा पगचिह्न दिखाई दिए थे। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया। इसके बाद रणनीतिक स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाए गए, जिनसे बाघ की मौजूदगी की पुष्टि हुई।

लोगों को सतर्क रहने की सलाह

बाघ की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड और पोस्टर लगाए हैं। साथ ही वनकर्मियों की विशेष ड्यूटी लगाकर 24 घंटे निगरानी की जा रही है।अधिकारियों का कहना है कि अब तक बाघ का व्यवहार सामान्य रहा है और किसी व्यक्ति पर हमले जैसी कोई घटना सामने नहीं आई है, लेकिन एहतियात के तौर पर लोगों को सतर्क रहने और अकेले जंगल या पहाड़ी क्षेत्र में न जाने की सलाह दी गई है।

पर्यटकों से की गई अपील

वन विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश नहीं करने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि बाघ की हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।वन अधिकारियों के अनुसार स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन जब तक बाघ क्षेत्र से आगे नहीं बढ़ जाता, तब तक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था जारी रहेगी।