Barwani district development: खबर मप्र के बड़वानी जिले से है जहां 27 साल हो गए हैं लेकिन अब भी यहां के लोग रेल लाइन, मेडिकल कॉलेज और नियमित जल आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। एक दिन छोड़कर पानी मिलना आम बात हो चुकी है। अब सवाल उठता है कि कब आएगा असली विकास?
27 साल की स्थापना, लेकिन विकास अधूरा
बतादें कि बड़वानी जिला 1998 में अस्तित्व में आया था लेकिन 27 साल बीत जाने के बाद भी यहां कई ज़रूरी ढांचे अधूरे हैं। न मेडिकल कॉलेज है, न इंजीनियरिंग, न कृषि और न ही वेटनरी कॉलेज। इनकी कमी से युवाओं को दूसरे ज़िलों या राज्यों में पलायन करना पड़ता है। यही नहीं, अब तक एक भी रेलवे लाइन बड़वानी को नहीं मिल पाई है।
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Barwani district development:[/caption]
आधारभूत सुविधाएं कमजोर, पलायन बन रहा विकल्प
यहां के स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी है। रोजगार के लिए फैक्ट्रियां और उद्योग नहीं हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग नौकरी और पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में पलायन करने को मजबूर हैं। जिले में रेलवे न होने से ट्रांसपोर्ट और व्यापार दोनों पर असर पड़ा है।
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स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे की स्थिति
हाल ही में स्वास्थ्य सेवाओं में कुछ नए भवन और सुविधाएं शुरू की गई हैं, लेकिन ज़रूरत के मुकाबले अब भी बहुत कम हैं। सड़कें और बिजली व्यवस्था में थोड़ा सुधार हुआ है, लेकिन सीवरेज और डिवाइडर रोड जैसी परियोजनाएं अब भी अधूरी हैं या निर्माणाधीन हैं।
जनता की उम्मीदें और सरकार की जिम्मेदारी
जिले के लोगों का मानना है कि अब जब ट्रिपल इंजन सरकार (केंद्र, राज्य और स्थानीय प्रशासन में एक ही दल) है, तो बड़वानी को बड़ी सौगातें मिलनी चाहिए थीं। लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे उलट है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर उनका इंतज़ार कब खत्म होगा?
समाजसेवियों और आंदोलनकारियों की राय
Barwani district development: NBA नेत्री मेधा पाटकर ता कहना है कि बड़वानी जैसे आदिवासी बाहुल्य ज़िले की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए। यहां के लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखना एक अन्याय है। तो वहीं समाजसेवी अजित जैन का भी कहना है कि 27 साल लंबा समय होता है... सरकार ने अगर वाकई इस जिले को विकसित करना है तो शिक्षा,स्वास्थ्य और यातायात, पानी पर फोकश करना ही होगा।
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