भोजशाला: वाग्देवी मंदिर घोषित होने के बाद पहली बार 'अखंड पूजा'
धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में वाग्देवी मंदिर घोषित होने के बाद पहली बार अखंड पूजा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता भोजशाला पहुंचे। पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी की विशेष पूजा-अर्चना कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की।
बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया
वाग्देवी मंदिर घोषित होने के बाद यह पहला अवसर है जब भोजशाला में अखंड पूजा संपन्न हुई। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और भजन-कीर्तन के बीच पूजा कार्यक्रम संपन्न कराया गया। मंदिर परिसर को फूलों और आकर्षक सजावट से सजाया गया था। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने भी बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया था।
हिंदू संगठनों ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि वर्षों के संघर्ष और कानूनी प्रक्रिया के बाद अब भोजशाला में धार्मिक गतिविधियों को नई पहचान मिल रही है। श्रद्धालुओं का कहना था कि मां वाग्देवी की पूजा से क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना को बल मिलेगा।
विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई
भोजशाला लंबे समय से विवादों के केंद्र में रही है। यहां पूजा-अर्चना और नमाज को लेकर कई बार विवाद सामने आते रहे हैं। हालांकि हालिया घटनाक्रम के बाद मंदिर पक्ष के लोगों में उत्साह बढ़ा है। अखंड पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए पूरे विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई।
प्रशासन ने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष इंतजाम किए थे। अधिकारियों ने बताया कि पूरे आयोजन पर नजर रखी गई और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होने दी गई। भोजशाला में आयोजित यह अखंड पूजा प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।