हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में हनुमान चालीसा , श्रद्धालु बोले- सालों बाद मन से हुए दर्शन
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर को वाग्देवी मंदिर मानने के फैसले के बाद शनिवार सुबह परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और हनुमान चालीसा पाठ हुआ। श्रद्धालुओं और विभिन्न समितियों के पदाधिकारियों ने शांतिपूर्ण माहौल में मां वाग्देवी के दर्शन किए। हाईकोर्ट के फैसले के बाद पहली बार बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे। कई लोगों ने कहा कि वर्षों बाद उन्हें बिना रोक-टोक पूजा करने का अवसर मिला है।
मां वाग्देवी के दरबार में हुई पूजा-अर्चना
शनिवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भोजशाला परिसर में श्रद्धालु पहुंचे। भोज उत्सव समिति और भोजशाला मुक्ति यज्ञ समिति से जुड़े पदाधिकारियों ने मां वाग्देवी के स्थान और यज्ञ कुंड पर पुष्प अर्पित कर पूजा की।इसके बाद परिसर में हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया। पूरे माहौल में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का वातावरण दिखाई दिया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को राजा भोज कालीन वाग्देवी मंदिर माना है। अदालत ने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों के साथ ASI की सर्वे रिपोर्ट को भी आधार बनाया।हिंदू पक्ष के वकील विष्णुशंकर जैन ने बताया कि अदालत ने 7 अप्रैल 2003 के ASI आदेश को आंशिक रूप से निरस्त किया है। इसी आदेश के तहत मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को सीमित समय के लिए नमाज की अनुमति दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में दायर हुईं कैविएट याचिकाएं
मुस्लिम पक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील की संभावना को देखते हुए हिंदू पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय में दो कैविएट याचिकाएं दायर की हैं।वकील विष्णुशंकर जैन ने बताया कि हाईकोर्ट ने लंदन के संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को वापस लाने के मुद्दे पर भी विचार किया है।फिलहाल भोजशाला परिसर और धार शहर में प्रशासन द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है।