भोपाल में तीन लोगों के बैंक खातों से 3.46 लाख रुपय

APK फाइल से 15 मिनट में खाली हो रहे बैंक खाते! भोपाल में नर्स समेत 3 लोगों से 3.46 लाख की साइबर ठगी

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साइबर ठगों ने एंड्रॉयड मोबाइल यूजर्स को निशाना बनाते हुए नर्स समेत तीन लोगों के बैंक खातों से मात्र 15 मिनट के भीतर 3.46 लाख रुपये उड़ा दिए। चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ मामलों में पीड़ितों ने न तो कोई ओटीपी साझा किया और न ही किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया, फिर भी उनके खाते से रकम निकल गई। साइबर अपराधियों द्वारा मोबाइल फोन में संदिग्ध APK फाइल के जरिए निगरानी और एक्सेस हासिल करने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।

नर्स के खाते से 15 मिनट में निकले 1 लाख रुपये

पिपलानी थाना क्षेत्र की रहने वाली कृष्णा वर्मा (48) एक निजी अस्पताल में नर्स हैं। शिकायत के अनुसार 30 मई को उनका मोबाइल अचानक बंद हो गया। करीब 15 मिनट बाद जब फोन दोबारा चालू हुआ तो उनके बैंक खाते से 1 लाख रुपये निकल चुके थे।पीड़िता का कहना है कि उन्होंने किसी अनजान लिंक या संदिग्ध एप्लीकेशन का उपयोग नहीं किया था।

गेम खेलते समय ड्राइवर का मोबाइल हुआ बंद

दूसरे मामले में बरखेड़ी निवासी मोहम्मद युसूफ (50) अपने वीवो मोबाइल पर कैंडी क्रश गेम खेल रहे थे। 12 मई को जहांगीराबाद क्षेत्र में अचानक उनका मोबाइल बंद हो गया। करीब 15 मिनट बाद मोबाइल चालू होने पर पता चला कि खाते से 1 लाख रुपये की ऑनलाइन निकासी हो चुकी है।

चार महीने बाद दर्ज हुआ तीसरा मामला

ऐशबाग निवासी अयान खान के खाते से 1.46 लाख रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित का बैंक खाता बंधन बैंक में था। बताया गया कि शिकायत के बावजूद मामला दर्ज कराने के लिए उन्हें कई महीनों तक प्रयास करना पड़ा। अयान खान का कहना है कि उन्होंने किसी प्रकार का ओटीपी साझा नहीं किया और न ही किसी APK फाइल या लिंक पर क्लिक किया था।

कैसे काम करते हैं APK आधारित साइबर फ्रॉड?

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार APK फाइलें एंड्रॉयड मोबाइल में एप इंस्टॉल करने के लिए उपयोग होती हैं। साइबर अपराधी इन्हें मैसेज, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप या ईमेल के जरिए भेजते हैं।

यदि उपयोगकर्ता ऐसी फाइल इंस्टॉल कर देता है तो:

  • मोबाइल का रिमोट एक्सेस अपराधियों को मिल सकता है।

  • बैंकिंग ऐप की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सकती है।

  • ओटीपी, एसएमएस और पासवर्ड तक पहुंच बनाई जा सकती है।

  • यूपीआई और नेट बैंकिंग ट्रांजेक्शन को नियंत्रित किया जा सकता है।

पुलिस ने बताए सुरक्षा के उपाय

  • किसी भी अनजान APK फाइल को इंस्टॉल न करें।

  • केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप डाउनलोड करें।

  • मोबाइल में डबल-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखें।

  • यूपीआई पिन और बैंकिंग पासवर्ड समय-समय पर बदलते रहें।

  • मोबाइल में इंस्टॉल एप्स की नियमित जांच करें।

  • संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें।

कॉल फॉरवर्डिंग जांचने की सलाह

पुलिस अधिकारियों के अनुसार मोबाइल में अनधिकृत कॉल फॉरवर्डिंग या अन्य सेटिंग्स की जांच भी समय-समय पर करनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि का पता लगाया जा सके।