भोपाल में आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या और रेबीज क

भोपाल में बढ़ती आवारा श्वानों की संख्या और नसबंदी की चुनौतियां

राजधानी भोपाल में आवारा और हिंसक श्वानों की बढ़ती संख्या लगातार लोगों की चिंता का कारण बन रही है। शहर के अलग-अलग इलाकों से आए दिन श्वानों के हमले, बच्चों और बुजुर्गों को काटने तथा रेबीज संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद अब तक नगर निगम की कार्रवाई कई बार श्वान प्रेमियों के विरोध और विवाद के कारण धीमी पड़ जाती थी। हालांकि अब सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश के बाद प्रशासन को सख्त कदम उठाने का रास्ता मिल सकता है।

रेबीज से संक्रमित पाया जाता

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि कोई श्वान खतरनाक या रेबीज से संक्रमित पाया जाता है, तो उसे इंजेक्शन देकर समाप्त किया जा सकता है। अदालत ने नवंबर 2025 में जारी नसबंदी और पुनर्वास संबंधी निर्देशों का सख्ती से पालन करने के आदेश भी दिए हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।

29,766 श्वानों का टीकाकरण किया

नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक भोपाल में आवारा श्वानों की संख्या सवा लाख से अधिक पहुंच चुकी है। इसके मुकाबले हर साल केवल 20 से 25 हजार श्वानों की ही नसबंदी हो पा रही है। वर्ष 2024-25 में निगम ने 21,452 श्वानों की नसबंदी और 26,427 श्वानों का एंटी-रेबीज टीकाकरण कराया, जिस पर करीब 2.35 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 23,363 श्वानों की नसबंदी और 29,766 श्वानों का टीकाकरण किया जा चुका है।

श्वानों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी

फिलहाल शहर में कजलीखेड़ा, अरवलिया गोशाला के पीछे और आदमपुर कचरा खंती क्षेत्र में तीन एबीसी सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। नगर निगम की टीमें रोजाना 50 से 65 आवारा श्वानों को पकड़कर इन केंद्रों तक पहुंचा रही हैं। बावजूद इसके श्वानों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।