उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा

CM धामी ने चारधाम यात्रा की सुरक्षा और व्यवस्था पर दिया जोर, बोले-32 लाख यात्री अब तक चारधाम आए

CM धामी ने की चारधाम यात्रा की समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा को लेकर को बात की। CM ने कहा कि अब तक 32 लाख तीर्थयात्री चारधाम यात्रा चुके हैं। आदि कैलाश यात्रा में भी करीब 40 लाख यात्री पहुंचे। हमारे यहां आस्था और श्रद्धा का बड़ा संगम दिखाई दे रहा है। आने वाले वक्त में हमारी कांवड़ यात्रा भी शुरू होने वाली है। हम इसकी भी तैयारी कर रहे हैं। हमारे यहां कुंभ मेला भी होने वाला है। 

श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्राथमिकता 

CM पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि चारधाम में श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप दर्शन व्यवस्था को ज्यादा व्यवस्थित बनाने के लिए मानक प्रचालन प्रक्रिया (SOP) में सख्त प्रावधान किए जाएं। रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक यात्रा मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पर रोक का सख्ती से पालन करें।

उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

सचिवालय में कुछ दिन पहले चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को कई दिशा-निर्देश दिए। कहा कि चारधाम यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद होना चाहिए। बेहतर समन्वय, प्रभावी संवाद व सुव्यवस्थित प्रबंधन से यात्रा को और ज्यादा सुरक्षित और सफल बनाया जा सकता है। यात्रा मार्गों पर ट्रकों और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े भारी वाहनों को ही रात के वक्त चलने की अनुमति दी जाए। दिन के समय बड़े वाहनों का संचालन प्रतिबंधित रखा जाए।

श्रद्धालुओं की आवाजाही पर नियंत्रित

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि किसी भी धाम या पड़ाव पर निर्धारित क्षमता से ज्यादा भीड़ होने पर होल्डिंग एरिया व प्रमुख चेक प्वाइंट्स पर वाहनों और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित किया जाए। भीड़ प्रबंधन के लिए चरणबद्ध व्यवस्था अपनाते हुए यात्रियों को आगे भेजा जाए, जिससे धामों में अव्यवस्था की स्थिति न हो। उन्होंने आदेश दिए कि जिन स्थानों पर श्रद्धालुओं को रोका या ठहराया जा रहा है, वहां पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय और अन्य सुविधाओं की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। यात्रियों को किसी भी परिस्थिति में सूचना के अभाव का सामना न करना पड़े।