गाजियाबाद में सूर्या की हत्या के बाद आरोपी असद को

बकरा हलाल होते देखा है..सूर्या की हत्या करने वाले असद का एनकाउंटर

गाजियाबाद में सूर्या की हत्या

गाजियाबाद में सूर्या की हत्‍या करने के बाद फरार चल रहे आरोपी असद का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया। रविवार तड़के इंदिरापुरम के अभय खंड में हुई मुठभेड़ में असद को मार गिराया। जबकि उसका साथी भाग निकलने में कामयाब रहा। खोड़ा और इंदिरापुरम पुलिस ने मिलकर इस संयुक्त अभियान को अंजाम दिया, जिसमें 1 कांस्टेबल घायल हो गया। मामले में 3 आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो गए थे .

आरोपी

‘कभी बकरा हलाल होते देखा है’

कभी बकरा हलाल होते देखा है.. नहीं तो आओ दिखाता हूं ऐसा बोलकर मुस्लिम युवकों ने सूर्या की चाकू घोपकर हत्या कर दी। गाजियाबाद में एक 17 साल के सूर्या को दोस्ती करने की सजा मिली। बकरीद पर उसके दोस्तों ने पार्टी करने के लिए बुलाया। सूर्या नए कपड़े पहनकर दोस्तों से मिलने गया, लेकिन उसे नहीं पता था की ये उसका आखिरी दिन है, वो जैसे ही वो दोस्तों से मिलने पहुंचा, असद ने पूछा कभी बकरे को हलाल होता देखा है, सूर्या ने कहा नहीं..असद ने चाकू निकाला और सूर्या को चाकू घोंपकर मार दिया। 

मृतक सूर्या

‘तुम्हारा भाई मर्डर करके आया’

हत्या करने के बाद असद ने वीडियो भी बनाया की तुम्हारा भाई मर्डर करके आया है। पुलिस ने बताया कि खोड़ा के नवनीत विहार में रहने वाले सूर्या चौहान को असद ने बुलाकर पूछा था कि कभी बकरा कटते हुए देखे हो। आओ दिखाता हूं। जब सूर्या ने इनकार किया तो असद ने उसके साथ गाली गलौज की। देखते ही देखते उसने चाकू निकाला और सूर्या के पेट में 4 बार वार किए। सूर्या जाने बचाने के लिए करीब 200 m तक भागा, लेकिन खून ज्‍यादा बहने के कारण वह नीचे गिर गया। घरवालों को जैसे ही जानकारी हुई, वे दौड़कर आए और उसे अस्‍पताल ले गए लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। 

मां की गुहार

11 में पढ़ने वाले सूर्या की मां ने आरोपियों का एनकाउंटर किए जाने की गुहार लगाई थी। मां ने कहा कि मैं चाहती हूं कि उसे भी मार दिया जाए, जिस तरह उसने मेरे बेटे को मारा। मैंने 28 मई के बाद से अपने बेटे का चेहरा भी नहीं देखा। मेरे 2 बेटे और 1 बेटी है। मेरा बड़ा बेटा दिव्यांग है। मुझे उम्मीद थी कि मेरा छोटा बेटा मेरा सहारा बनेगा, लेकिन अब उसे भी हमसे छीन लिया गया है। 

हिंदुओं की हत्या

उदयपुर में कन्नहैया लाल का मर्डर, होली पर तरुण कुमार की हत्या कर दी गई, बकरीद पर सूर्या को मार दिया गया, जिन लोगों को होली के रंग के दिक्कत होती है वो खून की होली खेल रहे है..सवाल है की हम कौनसे देश में रह रहे है और कौनसे सेकुलरिज्म की परिभाषा गढ़ रहे है।