ईडी की विशेष अदालत ने झारखंड के CM हेमंत सोरेन की

जमीन घोटाला मामले में झारखण्ड सीएम सोरेन को बड़ा झटका, ईडी कोर्ट ने खारिज की डिस्चार्ज याचिका

जमीन घोटाला मामले में झारखण्ड सीएम सोरेन को बड़ा झटका, ईडी कोर्ट ने खारिज की डिस्चार्ज याचिका

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित जमीन घोटाला मामले में बड़ा झटका लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष अदालत ने बरियातू रोड स्थित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मामले में उनकी डिस्चार्ज याचिका सोमवार को खारिज कर दी है। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार मौजूद हैं।

ईडी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने सोमवार को 140 पृष्ठों का विस्तृत आदेश सुनाया। इससे पहले 3 जून को सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

ईडी

अदालत ने क्या कहा?

अपने आदेश में अदालत ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और जांच सामग्री से आरोपों को लेकर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है। अदालत के अनुसार, यह आरोप तय करने और मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार है।

कोर्ट ने सीएम सोरेन की उस दलील को भी स्वीकार नहीं किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका इस कथित जमीन घोटाले से कोई संबंध नहीं है। अदालत ने माना कि मामले की विस्तृत जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की न्यायिक पड़ताल आवश्यक है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला रांची के बरियातू रोड स्थित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि इस जमीन पर अवैध कब्जा किया गया और बाद में फर्जी दस्तावेजों के जरिए उसे वैध दिखाने का प्रयास किया गया।

सीएम सोरेन

जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2010-11 के दौरान मूल कब्जाधारियों को बेदखल कर जमीन पर कब्जा किया गया। इसके बाद भू-राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत से रिकॉर्ड में हेरफेर करने की कोशिश की गई।

ईडी का दावा है कि जांच के दौरान तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के पास से कई मूल रजिस्टर और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए थे, जिनमें संबंधित जमीन का उल्लेख था। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि इस जमीन की जांच और सत्यापन को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर पर निर्देश दिए गए थे।

CM हेमंत सोरेन का पक्ष

CM हेमंत सोरेन ने अपनी याचिका में दावा किया था कि संबंधित भूमि किसी कथित अपराध से जुड़ी नहीं है और न ही उनके नाम पर कोई जाली दस्तावेज तैयार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि ईडी जिन गवाहों के बयानों पर भरोसा कर रही है, वे प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं बल्कि सुनी-सुनाई बातों पर आधारित हैं।

इस बहुचर्चित जमीन घोटाला मामले में ईडी अब तक 18 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। अदालत द्वारा डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने के बाद अब मामले में नियमित सुनवाई और आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।