इंदौर में 'आतंकी' कुत्ते की तलाश जारी: 40 लोगों को काटने वाला डॉग अब भी फरार, 23 कुत्ते पकड़े गए
अरबिंदो अस्पताल से शुरू हुआ हमला, डॉक्टर-नर्सों समेत 40 से ज्यादा लोग घायल
मध्य प्रदेश के इंदौर में एक आवारा कुत्ते ने शुक्रवार को ऐसा आतंक मचाया कि डॉक्टर, नर्स, मेडिकल स्टूडेंट्स, मरीज और राहगीरों समेत 40 से अधिक लोग उसका शिकार बन गए। घटना के 24 घंटे बाद भी हमला करने वाला कुत्ता नगर निगम की पकड़ से बाहर है।नगर निगम की टीम ने शनिवार को अरबिंदो अस्पताल और आसपास के इलाकों में विशेष अभियान चलाकर 23 कुत्तों को पकड़ा, लेकिन जिस कुत्ते ने लोगों पर हमला किया था, उसकी तलाश अब भी जारी है।
अस्पताल से शुरू हुआ हमलों का सिलसिला
जानकारी के मुताबिक शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे कुत्ता अरबिंदो अस्पताल परिसर में घुसा और सबसे पहले अस्पताल स्टाफ पर हमला किया। इसके बाद वह सांवेर रोड और आसपास के इलाकों में घूमता रहा तथा लगातार लोगों को काटता गया।अरबिंदो अस्पताल प्रबंधन के अनुसार अस्पताल से जुड़े 16 से अधिक डॉक्टर, नर्स और कर्मचारी इस हमले में घायल हुए।
कॉलेजों और गांवों तक फैला डर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमला करने वाला कुत्ता अस्पताल परिसर से निकलकर रेवती रेंज, बरदरी गांव, एलएनसीटी कॉलेज, रेनेसा कॉलेज, नरसिंह मुंजी कॉलेज और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच गया।घटना के बाद विद्यार्थियों, ग्रामीणों और स्थानीय रहवासियों में दहशत का माहौल है। कई लोगों ने अकेले आने-जाने से बचना शुरू कर दिया है, जबकि अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
घायलों को लगाए गए एंटी रेबीज इंजेक्शन
हमले में घायल हुए सभी लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। पीड़ितों को एंटी रेबीज वैक्सीन और अन्य जरूरी उपचार उपलब्ध कराया गया।इलाज कराने वालों में डॉक्टर, अस्पताल कर्मचारी, छात्र और स्थानीय नागरिक शामिल हैं।
नगर निगम पर बढ़ा दबाव
स्थानीय लोगों और अस्पताल प्रबंधन ने नगर निगम से मांग की है कि हमलावर कुत्ते को जल्द से जल्द पकड़कर क्षेत्र को सुरक्षित बनाया जाए. निगम अधिकारियों का कहना है कि सर्च ऑपरेशन जारी है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमों को भी लगाया जाएगा।
इंदौर में बढ़ रही डॉग बाइट की समस्या
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब इंदौर में डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।शासकीय हुकुमचंद पॉलीक्लिनिक (लाल अस्पताल) के अनुसार शहर में प्रतिदिन करीब 200 डॉग बाइट पीड़ित उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या और नसबंदी अभियान की सीमित गति इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। एक ही दिन में 40 से ज्यादा लोगों को काटने की घटना ने शहर में आवारा कुत्तों की समस्या को फिर सुर्खियों में ला दिया है। सवाल यह है कि जब अस्पताल और शैक्षणिक संस्थान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी आवारा कुत्ते आसानी से पहुंच रहे हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?