वाराणसी एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय शूटर जसपाल राणा

शूटर जसपाल राणा का पार्थिव शरीर पहुंचा वाराणसी, आखिरी बार गुरु को देख फूट-फूटकर रोई मनु

जसपाल राणा का पार्थिव शरीर पहुंचा वाराणसी

वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर दोपहर लगभग 3:52 बजे चार्टर विमान से अंतरराष्ट्रीय शूटर जसपाल राणा का पार्थिव शरीर पहुंचा। एयरपोर्ट के पुराने टर्मिनल भवन स्थित एयर कार्गो परिसर में पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलिऔर सलामी दी गई।

नेताओं-जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि 

इस दौरान शोक का माहौल रहा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में समर्थक और शुभचिंतक मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे विधायक पंकज सिंह दोपहर करीब 12:15 बजे ही एयरपोर्ट पहुंचे। श्रद्धांजलि के दौरान परिजनों के साथ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री शंकर गिरी, पूर्व जिला अध्यक्ष आजमगढ़ जय नाथ सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार

एयरपोर्ट से निशानेबाज जसपाल राणा का पार्थिव शरीर घाट के लिए रवाना हो गया है। सबसे पहले उनका पार्थिव शरीर राजघाट जाएगा, जहां से मणिकर्णिका घाट ले जाया जाएगा। चाचा राजेंद्र राणा ने बताया कि जसपाल ने कई बार इच्छा जताई थी कि उनका अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर हो। इसी वजह से परिवार ने बनारस में अंतिम संस्कार का निर्णय लिया है। 

फूट-फूटकर रोई मनु

ओलिंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर अपने कोच जसपाल राणा को अंतिम विदाई देने देहरादून पहुंची थी। कोच के पार्थिव शरीर को देख वह खुद को रोक नहीं पाईं और जसपाल राणा के पिता से लिपटकर रो पड़ीं। मनु के करियर में जसपाल राणा की भूमिका बेहद अहम रही है। जूनियर स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में उन्होंने मनु भाकर को लगातार मार्गदर्शन दिया। पेरिस ओलिंपिक में मनु के 2 पदकों के पीछे भी जसपाल राणा के प्रशिक्षण और अनुभव को बड़ी वजह माना जाता है।

इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ी

जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में माने जाते हैं। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके नाम 600 से ज्यादा पदक दर्ज हैं। 1994 में मिलान में हुई जूनियर वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। उसी साल हिरोशिमा एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।