राज्यसभा चुनाव: परिमल नाथवाणी की एंट्री से बढ़ी सियासी हलचल, CM सोरेन की दिल्ली यात्रा पर कांग्रेस की नजर
झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी के चुनावी मैदान में उतरने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दिल्ली दौरे ने राज्य की सियासत को नई दिशा दे दी है। इस बीच कांग्रेस खेमे में भी बेचैनी बढ़ती दिखाई दे रही है, क्योंकि चुनावी समीकरणों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान विधायकों के टूटने या क्रॉस-वोटिंग की आशंकाएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का दिल्ली में सक्रिय रहना विपक्षी दलों के साथ-साथ महागठबंधन के सहयोगी दलों के लिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
केंद्रीय एजेंसियों की जांच बनी बड़ी चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव से इतर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने केंद्रीय जांच एजेंसियों से जुड़े मामले भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। भूमि और खनन से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तथा अन्य एजेंसियों की कार्रवाई लगातार सुर्खियों में रही है।
हालांकि राजनीतिक हलकों में केंद्रीय नेताओं और झारखंड के मुख्यमंत्री के बीच संभावित मुलाकातों को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भूमि मामले में ईडी की कार्रवाई
रांची के बड़गई सर्कल स्थित शांति नगर में 8.86 एकड़ भूमि से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की जांच जारी है। जानकारी के अनुसार, इस मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा राहत की मांग किए जाने के बावजूद अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार नहीं की। जांच एजेंसी का कहना है कि उसके पास मामले से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
अवैध खनन मामले की भी जांच जारी
साहिबगंज और आसपास के क्षेत्रों में कथित अवैध खनन से जुड़े मामलों की जांच भी एजेंसियों द्वारा की जा रही है। आरोप है कि वर्ष 2022 से जुड़े इस मामले में बड़े पैमाने पर अवैध पत्थर खनन और उससे संबंधित आर्थिक अनियमितताओं की जांच चल रही है। हालांकि इन मामलों में अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है और जांच प्रक्रिया जारी है।
कांग्रेस को सताने लगी चुनावी चिंता
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन के विधायकों को एकजुट बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। पार्टी को आशंका है कि यदि चुनावी अवधि में सहयोगी दलों का नेतृत्व पूरी तरह सक्रिय नहीं रहा तो विपक्षी उम्मीदवार को लाभ मिल सकता है।
भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी को राजनीतिक रणनीति और चुनावी प्रबंधन में दक्ष माना जाता है। वह पूर्व में भी राज्यसभा चुनाव जीत चुके हैं। ऐसे में चुनावी मुकाबले को लेकर महागठबंधन के भीतर सतर्कता बढ़ गई है। फिलहाल सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और चुनावी गणित साधने में जुटे हुए हैं।