कर्नाटक में श्री श्री रविशंकर से मिले सीएम सुक्खू, प्राकृतिक खेती और गौ संरक्षण पर हुई खास चर्चा
कर्नाटक दौरे पर पहुंचे हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से मुलाकात कर सामाजिक, आध्यात्मिक और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा की। इस दौरान प्राकृतिक खेती, गौ संरक्षण, ग्रामीण आत्मनिर्भरता और भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करने जैसे मुद्दे बातचीत के केंद्र में रहे।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती और जैविक जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में किसानों को रासायनिक खेती से हटाकर प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित किया जा रहा है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को बेहतर स्वास्थ्य भी मिल सके।
गौ संरक्षण को लेकर सरकार की नई पहल
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार गौ संरक्षण और संवर्धन को लेकर कई योजनाओं पर काम कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में बड़े स्तर पर गौ-सदनों और गौ-अभ्यारण्यों की स्थापना की गई है। इसके साथ ही सरकार स्वयंसेवी संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों और उद्योग समूहों को सरकारी गौ-सदनों को गोद लेने की अनुमति देने की योजना भी तैयार कर रही है।
उन्होंने कहा कि यह पहल केवल पशु संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और सामाजिक सहभागिता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
आश्रम में की गौसेवा, हिमाचल के लोगों से मिले
कर्नाटक स्थित आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने आश्रम परिसर में गौसेवा भी की। इस दौरान उन्होंने वहां सेवाएं दे रहे हिमाचल प्रदेश के लोगों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। मुख्यमंत्री ने कहा कि देशभर में हिमाचल के लोग अपनी मेहनत, ईमानदारी और संस्कारों के कारण अलग पहचान बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आश्रम में हिमाचल के लोगों से मिलकर उन्हें पारिवारिक अपनापन महसूस हुआ। साथ ही मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि हिमाचल प्रदेश में स्थित आश्रम और उससे जुड़े सामाजिक एवं आध्यात्मिक कार्यों को राज्य सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।
श्री श्री रविशंकर ने की पहल की सराहना
इस अवसर पर श्री श्री रविशंकर ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती और गौ संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संतुलन के लिए इस तरह की पहल बेहद जरूरी है और इससे समाज को सकारात्मक दिशा मिलेगी।