मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला को माना मां वाग्देवी का मंदिर, अब होगी सिर्फ पूजा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार स्थित भोजशाला को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शुक्रवार को दिए गए इस निर्णय में कोर्ट ने भोजशाला को मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर माना है और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंपी है। साथ ही हिंदू पक्ष को यहां पूजा-अर्चना का अधिकार भी प्रदान किया गया है।
शांति बनाए रखने की अपील
वहीं, मुस्लिम पक्ष इस स्थल को कमाल मौला मस्जिद मानता रहा है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को निर्देश दिया है कि वे मस्जिद के लिए सरकार से वैकल्पिक जमीन की मांग कर सकते हैं। फैसले के बाद क्षेत्र में संवेदनशीलता बढ़ गई है, खासकर शुक्रवार होने के कारण, जब मुस्लिम समाज यहां जुमे की नमाज अदा करता है। इसी को देखते हुए इंदौर और धार जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है और दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
वर्षभर पूजा और हवन हो सके
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने तर्क दिया कि भोजशाला पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट लागू नहीं होता, क्योंकि यह ASI द्वारा संरक्षित प्राचीन स्मारक है और 1951 के अधिनियम में सूचीबद्ध है। उन्होंने 7 अप्रैल 2003 के आदेश को निरस्त करने और स्थल को पूर्ण रूप से हिंदू समाज को सौंपने की मांग की, ताकि वर्षभर पूजा और हवन हो सके।
ASI सर्वे की पारदर्शिता पर भी सवाल
वहीं मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि भोजशाला मंदिर, मस्जिद या जैनशाला है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट का है और ASI सर्वे की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।
जैन समाज ने भी दावा किया कि यहां मिली प्रतिमा मां अंबिका की है, जिन्हें वे अपनी आराध्य देवी मानते हैं। इस प्रकार यह मामला धार्मिक, ऐतिहासिक और कानूनी दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है।