सुलभ न्याय के लिए एमपी हाई कोर्ट ने लॉन्च किए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सीएम डॉ. मोहन बोले- नवाचारों ने आसान कर दीं व्यवस्थाए
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 16 मई को जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस कल्चर एंड इंफोर्मेशन सेटंर में आयोजित 'फ्रेगमेंटेशन ऑफ फ्यूजन: एम्पावरिंग जस्टिस वाया-यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन' कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश के इतिहास में न्याय की प्रक्रिया सम्राट विक्रमादित्य और बेताल के प्रसंगों से जुड़ती है। सम्राट विक्रमादित्य का सुशासन और पारदर्शी न्याय व्यवस्था आज भी हमारे लिए नजीर है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय ज्ञान परंपरा की किवदंतियों के माध्यम से प्राचीन भारत के समृद्ध न्याय तंत्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ने सदैव नागरिकों के लिए न्यायपूर्ण शासन का संचालन किया। मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने कहा कि आज के समय में न्याय तंत्र को सरल बनाने में आधुनिक तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित बनाए रखने में हमारे न्याय तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने नवाचारों के माध्यम से व्यवस्थाओं को आसान बनाया है। प्रदेश में मूक-बधिरों के लिए मोबाइल एप्लीकेशन से न्याय, फाइलों के त्वरित निराकरण, कोर्ट ऑडर्स का डिजिटल सर्टिफिकेशन करते हुए बेहतर प्रबंधन का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने तकनीकी नवाचारों के माध्यम से प्रदेश की नागरिकों के लिए साइबर तहसील जैसी अनेक व्यवस्थाएं लागू की हैं। मंत्री परिषद की बैठकों में भी ई-फाइल प्रक्रिया की शुरुआत की गई है। राज्य सरकार नागरिकों की सुविधा के लिए डिजिटल व्यवस्थाओं को प्रोत्साहन प्रदान कर रही है।
ट्रांसफॉर्म-रिफॉर्म-परफॉर्म की ओर तेजी से बढ़ रहा देश
केंद्रीय विधि एवं कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था में आज एक ऐतिहासिक दिन है। सम्राट विक्रमादित्य का सिंहासन धरती में दबकर भी न्याय करता था। मध्यप्रदेश ईज ऑफ लीविंग और ईज ऑफ जस्टिस की ओर तेजी से बढ़ रहा मध्यप्रदेश ने सीसीटीएनएस, मूक-बधिरों के लिए ऐप्लीकेशन की शुरुआत करके नवाचार किया। अब मशीन लर्निंग, एआई, डिजिटल प्रिंटिंग हमारी जीवनशैली का अभिन्न अंग बन चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ट्रांसफॉर्म, रिफॉर्म और परफॉर्म की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश ने देशभर के हाई कोर्ट को न्याय प्रक्रिया के सशक्तिकरण की दिशा दिखाई है। तकनीकी एकीकरण से न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी। इनसे नागरिकों में न्याय के प्रति विश्वास बढ़ेगा।
न्याय प्रक्रिया को बनाया तेज और सरल
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जबलपुर में मां नर्मदा के दर्शन कर धन्य हुआ। वहां जाकर देखा कि छोटी-छोटी कई नदियों और झरनों से मिलकर विशाल मां नर्मदा के दर्शन होते हैं। आज ऐसा ही अनुभव हो रहा है। जब तकनीक की धारा में हमारे कोर्ट, पुलिस, प्रिजन, फॉरेंसिक और मेडिको लीगल सभी एक साथ मिलकर कार्य करने के लिए सक्षम हुए हैं। सभी मिलकर मां नर्मदा की धारा की तरह एक दिशा में प्रवाहमान होंगे। आज हमारे अस्पतालों में मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री एक स्क्रीन पर इंटीग्रेटेड है। अगर कोई डॉक्टर के पास जाकर अपनी परेशानी बताता है तो डॉक्टर को एक स्क्रीन पर मरीज की पुरानी बीमारियों की जानकारी मिल जाती है। इसी प्रकार अब समय आ गया है कि हमारी न्यायपालिका अस्पतालों की तरह 24X7 कार्य करे। ऐसी जरूरत महसूस की जा रही थी कि न्यायपालिका उस दिशा में कार्य करे, जहां नागरिकों को त्वरित रूप से रिलीफ मिल सके। जैसी व्यवस्था हमारे अस्पतालों में इमरजेंसी सिस्टम के माध्यम से उपलब्ध होती है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट और राज्य सरकार को बधाई देता हूं। जिसने नागरिकों के लिए डिजिटल सुविधाओं का विकास कर न्याय प्रक्रिया को तेज और सरल बनाया है। हाई कोर्ट के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से समय पर बंदियों को मुक्त करने, अर्जेंट हियरिंग, कोर्ट ऑर्डर का डिजिटलीकरण जैसी अनेक सुविधाएं मिलेंगी। आम आदमी के लिए ज्यूडीशियल फैसिलिटी की शुरुआत सराहनीय है। यह प्रयास देशभर की अदालतों में लागू किया जाएगा।
सरल हुआ जानकारी मिलना
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आलोक अराधे ने कहा कि आज मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण की दिशा में नया अध्याय शुरू किया है। देश की न्यायपालिका कोर्ट, पुलिस, प्रिजन, फॉरेंसिक और मेडिको लीगल सर्विसेस के साथ कार्य करती है। न्याय प्रक्रिया में विलंब संवैधानिक चिंता का विषय था, लेकिन अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नवाचारी पहलों से नई दिशा दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की यह नवाचारी पहल अभियोजन पक्ष, पुलिस और नागरिकों के लिए न्याय प्रक्रिया के नए द्वार खोल रही है। डिजिटल तकनीक के उपयोग से देश की न्याय व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले ने कहा कि तकनीक से न्यायिक प्रक्रिया आसान हुई है। जनरेटिव एआई के उपयोग के कई बार आदेश में ऐसे मामलों का जिक्र होने की आशंका रहती है, जो फैसले कभी किसी कोर्ट ने दिया ही नहीं था। इसीलिए वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी के नॉलेज का कोई अर्थ नहीं है। ज्ञान कठिन परिश्रम से ही प्राप्त होता है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि जस्टिस डिलीवरी सिस्टम अकेले काम नहीं करता है। यह सिस्टम पुलिस, जेल, कोर्ट, फॉरेंसिक और मेडिको लीगल के सहयोग से कार्य करता है। न्याय व्यवस्था के लिए जिम्मेदार संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ने से न्याय प्रक्रिया में तेजी आई है। सिक्किम ऐसा राज्य बन चुका है, जहां न्यायपालिका पूरी तरह से डिजिटल और पेपर लेस हो चुकी है। मध्यप्रदेश में भी न्याय प्रक्रिया के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, वन केस वन डाटा की दिशा में क्रांतिकारी सिद्ध होंगे।
आसान होगा नागरिकों का जीवन
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट आज एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च कर रहा है। अब फरियादियों को न्यायालय के फैसलों की कॉपी के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत के मार्गदर्शन में तैयार हुआ हाईकोर्ट का यह डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिकों के जीवन को आसान बनाएगा। आज हम 'फ्रेगमेंटेशन ऑफ फ्यूजन" के माध्यम से ऐसी प्रक्रिया की ओर बढ़ रहे हैं, जहां सूचनाओं का प्रवाह तेजी और पारदर्शिता के साथ होगा। मध्यप्रदेश लीगल अथॉरिटी ने सबसे लिए न्याय की प्रक्रिया को आसान बनाने का जिम्मा उठाया है। अब आम लोगों के साथ पुलिस को भी ई-समन जारी करना आसान हुआ है। इसके जरिए जमानत के आवेदनों का निपटारा करने में भी तेजी आई है। प्रेजेंटेशन में बताया गया कि अब अपराधियों की जानकारी सीसीटीएनएस के क्राइम नंबर, कोर्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (सीआईएस) के सीएनआर नंबर और ई-प्रिजन के प्रिजनर आईडी से मैच करना आसान होगा। इस प्रक्रिया से रियल टाइम में जानकारियां साझा की जा सकेंगी। हाईकोर्ट के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जमानत और केस से जुड़े फैसलों की ई-कॉपी उपलब्ध होगी।