मध्यप्रदेश सरकार ने स्कूली शिक्षा में बड़े पैमाने प

आने वाले दिनों में बदल जाएगी स्कूलों की सूरत, जानें सीएम डॉ. मोहन ने बनाया क्या प्लान ?

भोपाल। आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश के स्कूलों की सूरत ही बदल जाएगी। स्कूल न केवल सम्मानित होंगे, बल्कि वे ऐसे छात्र भी तैयार करेंगे जो संस्था के विकास और विस्तार में योगदान देंगे। इतना ही नहीं आने वाले सिलेबस में अब सम्राट वीर विक्रमादित्य की जीवनी भी शामिल होगी। भगवान श्री कृष्ण के गुरु सांदीपनि के जीवन पर भी रोचक पुस्तक तैयार की जाएगी। स्कूलों में बच्चों को व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 21 मई को स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कई तरह के निर्देश दिए।   विकास-विस्तार में कुछ योगदान 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमारी सरकार सांदीपनि विद्यालय जैसी अत्याधुनिक शालाओं में शिक्षा देकर प्रदेश की एक मजबूत नींव तैयार कर रही है। प्रदेश के हर विद्यार्थी तक बेहतरीन शैक्षणिक सुविधाएं और संसाधन समय पर पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभागीय गतिविधियों में तेजी लाएं और 16 जून से प्रारंभ हो रहे शैक्षणिक सत्र से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पूर्व छात्र-छात्रा सम्मेलन कराए जाएं, ताकि ऐसे विद्यार्थी जो अपने विद्यालय से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं, वे उस विद्यालय के विकास-विस्तार में कुछ योगदान भी कर सकेंगे।

जन-जन तक पहुंचाएं सांदीपनि स्कूल की अवधारणा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने परीक्षा परिणामों में और अधिक सुधार लाने के लिए शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने, नियमित मॉनीटरिंग, तकनीक और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति अपनाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जिन स्कूलों ने शत-प्रतिशत रिजल्ट दिया है, उनका सार्वजनिक सम्मान किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 26 स्कूल ऐसे हैं, जहां शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम आया है। यहां के सारे विद्यार्थी उत्तीर्ण हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन स्कूलों के अलावा 90 या 95 प्रतिशत से अधिक रिजल्ट देने वाली संस्थाओं को भी सम्मानित किया जाए। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय की अवधारणा-योजना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना भी तैयार की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को ऐसे जिलों को चिन्हित करने को कहा, जहां सभी स्कूलों में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं उपलब्ध हों, साथ ही भौतिक एवं मानव संसाधन की कमी वाले जिलों की भी अलग श्रेणी तैयार की जाए। इससे सरकार को इन्हीं जिलों पर फोकस करने में आसानी होगी। कमी वाले जिलों पर इसी साल से काम प्रारंभ किया जाएगा। उन्होने कहा कि प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारी स्थानीय विधायक के साथ बैठकर पूरी विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों में व्यवस्थाओं की बेहतरी के लिए प्रयास करें।

घोषणाओं का जल्द हो पालन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को सम्राट वीर विक्रमादित्य की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुरु सांदीपनि के जीवन पर भी एक रोचक पुस्तक तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा समय-समय पर की गई सभी घोषणाओं का जल्द से जल्द पालन कराएं। एक वर्ष से पुरानी कोई भी घोषणा लंबित न रहे। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग की वर्तमान में संचालित 14 विभागीय योजनाओं को निरंतर रखने की सहमति दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के बेहतरी के लिए सरकार हर जरूरी प्रयास करेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया 1 जुलाई से पहले पूरी कर ली जाए। सत्र प्रारंभ होने से पहले स्कूलों में सभी पूर्व तैयारियां कर ली जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छोटे बच्चों की शिक्षा के लिए प्रारंभ से ही माहौल बनाया जाए। महिला बाल विकास विभाग भी इसमें योगदान दे। गौरतलब है कि, मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर अब प्रदेश के इतिहास में पहली बार स्कूल शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग बच्चों की गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लिए एक साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में 1 जुलाई से गुरु पूर्णिमा यानी 29 जुलाई तक शिक्षक वंदना कार्यक्रम, अभिभावकों एवं जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया जाए। निजी विद्यालय खोलने के लिए सामाजिक संस्थाओं और संगठनों को प्रोत्साहन दिया जाए।

स्कूलों में दिया जाए व्यावसायिक प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाए। हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी कक्षाओं में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं अन्य रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का भी अध्ययन कराया जाए। संभव हो तो क्षेत्रीय स्व-सहायता समूहों को भी ऐसी शालाओं और विद्यार्थियों से जोड़ा जाए। स्कूली शिक्षा में कक्षा 8 से 12 में एआई के कौशल को कैसे जोड़ा जाए, इस पर भी एक कार्य योजना तैयार की जाए। स्कूलों में एनसीसी, एनएसएस जैसे सामाजिक सेवा कार्य को भी बढ़ावा दिया जाए। स्वास्थ्य परीक्षण, ड्राइविंग लायसेंस कैम्प, प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग की  सुविधा उपलब्ध कराने के भी प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासकीय स्कूलों से पास आउट विद्यार्थी  12वीं कक्षा के बाद उच्च शिक्षा, रोजगार, कृषि कार्य, पैतृक व्यवसाय, कौशल प्रशिक्षण जैसे किस कार्य-रोजगार में लगे हैं, इसकी ट्रैकिंग भी होनी चाहिए। इससे सरकार के पास हमारे युवाओं का एक डेटाबेस तैयार होगा।  

शासकीय स्कूलों में बढ़ी नामांकन दर

बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा ने बताया कि शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों के नामांकन वृद्धि के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आया है। वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में शासकीय विद्यालयों में कक्षा-1 में नामांकन में करीब 32.4 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, कक्षा 9 से 12 के नामांकन में 4.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो पिछले वर्षों की तुलना में सर्वाधिक है। इस साल प्रदेश के सभी शासकीय स्कूलों में 1 अप्रैल को प्रवेशोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया। अप्रैल माह में ही 92 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों का शाला प्रवेश करा दिया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में राजगढ़ जिले के भैंसवामाता एव नरसिंहपुर जिले के गाडरवाड़ा में संस्कृति विद्यालय प्रारंभ किए गए हैं।

‍शिक्षा घर योजना को सैद्धांतिक सहमति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में विभाग के सचिव की 'शिक्षा घर योजना' के नाम से नई योजना का प्रेजेंटेशन देने की सराहना की और इसकी सैद्धांतिक सहमति दी। इस योजना में किसी वजह से स्कूली शिक्षा पूरी न कर पाने वाले विद्यार्थियों को हाईस्कूल-हायर सेकेण्डरी परीक्षा उत्तीर्ण करने का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। योजना से ऐसे सभी किशोर-किशोरी, युवक-युवती लाभान्वित होंगे, जिन्होंने कक्षा 8 या इसके बाद की कक्षाओं में अनुत्तीर्ण होने पर पढ़ाई समाप्त कर दी थी। योजना का क्षेत्र सम्पूर्ण मध्यप्रदेश होगा, जिसमें प्रदेश की सभी ग्राम, पंचायतें और नगरीय निकाय भी शामिल होंगे। योजना का क्रियान्वयन म.प्र. राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा किया जाएगा।