मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने क

मध्य प्रदेश सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की प्रक्रिया तेज की

मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लागू करने की दिशा में सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। राज्य सरकार द्वारा गठित समिति को यूसीसी का प्रारूप तैयार करने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। समिति विभिन्न सामाजिक, कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशों सहित ड्राफ्ट सरकार को सौंपेगी।

समान नागरिक अधिकार सुनिश्चित कर सके

सूत्रों के अनुसार, समिति नौ प्रमुख बिंदुओं के आधार पर यूसीसी का मसौदा तैयार कर रही है। इन बिंदुओं में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने, संपत्ति अधिकार और पारिवारिक कानूनों से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है। समिति का उद्देश्य ऐसा प्रारूप तैयार करना है जो संविधान की भावना के अनुरूप हो और सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक अधिकार सुनिश्चित कर सके।

मानसून सत्र के दौरान पेश किया जा सकता है

जानकारी के मुताबिक समिति की रिपोर्ट और ड्राफ्ट अगस्त माह तक सरकार को सौंपा जा सकता है। इसके बाद राज्य सरकार प्रस्तावित कानून का परीक्षण कर आवश्यक संशोधन करेगी। यदि प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है, तो यूनिफॉर्म सिविल कोड का मसौदा विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पेश किया जा सकता है।

सरकार यूसीसी को सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान नागरिक अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है। वहीं इस विषय पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों से भी सुझाव लिए जा रहे हैं, ताकि कानून को अधिक प्रभावी और व्यवहारिक बनाया जा सके।

राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे इस प्रस्ताव पर प्रदेशभर की नजरें टिकी हुई हैं। यदि यूसीसी का ड्राफ्ट मानसून सत्र में पेश होता है और विधानसभा से मंजूरी मिलती है, तो मध्य प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल हो सकता है जहां समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। आने वाले सप्ताहों में समिति की रिपोर्ट और सरकार के रुख पर विशेष ध्यान रहेगा।