फलों का राजा ‘नूरजहां’: आलीराजपुर का ऐसा आम, जिसकी पेड़ पर लगते ही हो जाती है बुकिंग
मध्यप्रदेश के आलीराजपुर जिले का मशहूर ‘नूरजहां’ आम इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है। अपने विशाल आकार, अनोखी मिठास और खास खुशबू के लिए प्रसिद्ध यह आम इतना दुर्लभ माना जाता है कि पेड़ पर फल लगते ही इसकी एडवांस बुकिंग शुरू हो जाती है।
प्रदेश के आदिवासी अंचल आलीराजपुर में उगने वाला यह खास आम देश के सबसे बड़े और प्रीमियम आमों में गिना जाता है। इसकी सीमित पैदावार और खास गुणवत्ता के कारण बाजार में एक फल की कीमत 1000 से 2500 तक पहुंच रही है।
2 से 4 किलो तक होता है एक आम का वजन
नूरजहां आम की सबसे बड़ी खासियत उसका आकार है। सामान्य आमों की तुलना में यह कई गुना बड़ा होता है। किसानों के अनुसार इस बार एक आम का वजन 2 किलो से लेकर 4 किलो तक पहुंच सकता है।इतना ही नहीं, इसकी गुठली का वजन ही करीब 150 से 200 ग्राम तक होता है। किसानों का दावा है कि वर्ष 1978 में एक पेड़ पर 4.700 किलोग्राम वजन का नूरजहां आम पैदा हुआ था, जिसका रिकॉर्ड आज भी कायम है।
फल लगते ही शुरू हो जाती है एडवांस बुकिंग
कट्ठीवाड़ा क्षेत्र के किसान शिवराज सिंह जाधव के अनुसार इस बार उनके बाग में नूरजहां के केवल तीन पेड़ों पर करीब 80 फल लगे हैं। मौसम की मार के चलते उत्पादन कम रहा, लेकिन मांग लगातार बनी हुई है।उन्होंने बताया कि जैसे ही पेड़ों पर फल आते हैं, ग्राहक एडवांस बुकिंग शुरू कर देते हैं। इस बार मध्यप्रदेश के साथ-साथ गुजरात से भी कई लोगों ने पहले से बुकिंग करा रखी है।
स्वाद और खुशबू बनाती है खास
नूरजहां आम सिर्फ आकार में ही बड़ा नहीं होता, बल्कि स्वाद के मामले में भी बेहद खास माना जाता है। इसका गूदा रसीला, मुलायम और बेहद कम रेशेदार होता है। इसमें एक अलग तरह की शाही खुशबू होती है, जो इसे अन्य आमों से अलग पहचान देती है। आम प्रेमियों के बीच इसकी मांग हर साल लगातार बढ़ती जा रही है।
अफगानिस्तान से मालवा तक पहुंचा ‘नूरजहां’
जानकारों के मुताबिक नूरजहां आम की उत्पत्ति अफगानिस्तान क्षेत्र में मानी जाती है। बाद में यह भारत पहुंचा और 1950-60 के दशक में मालवा, झाबुआ और आलीराजपुर क्षेत्र में इसकी खेती शुरू हुई।कट्ठीवाड़ा के जूना क्षेत्र स्थित शिव बावड़ी आम फार्म के किसान भरतराज सिंह जाधव बताते हैं कि उनके पिता रणवीरसिंह जाधव करीब 55-60 वर्ष पहले गुजरात के बनमाह क्षेत्र से इसका पौधा लेकर आए थे। आज यही आम आलीराजपुर की पहचान बन चुका है।