हमारी यात्रा आत्मबोध से विश्वबोध की तरफ होनी चाहिए : गोपाल शर्मा
न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: हमारी यात्रा आत्मबोध से विश्वबोध की तरफ होनी चाहिए. "यत्र पिंडे, तत्र ब्रह्माण्डे" का बोध होना चाहिए, विश्व को जानने के लिए आत्म का ज्ञान प्रथम है, प्रकृति हमें कई प्रकार की चीजें उपलब्ध कराती है, परन्तु हमें यह जानना अति आवश्यक है कि हम प्रकृति को क्या देते हैं, यह बात विद्यापति दलाल हरमू रांची में अखिल भारतीय साहित्य परिषद, झारखंड के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी "आत्मबोध से विश्वबोध" कार्यक्रम के मुख्यअतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रसारण गोपाल शर्मा ने कही,
कार्यक्रम मैथिली मंच के विद्यापति सभागार में किया गया इस अवसर पर गोपाल शर्मा ने कहा कि आज समाज को जाति, भाषा, प्रांत आदि से बांटने का कार्य किया जाता है, उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज जिन्होंने राष्ट्र की स्वाधीनता, विकास, श्रेष्ठता में अपना अहम योगदान दिया, उन्हें बाहर धकेल दिया और सत्ता हथिया ली, इन्हीं का आत्मबोध करना है और राष्ट्रहित में कार्य करना है,
इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अशोक सिंह डॉ ने अपने उद्बोधन में कहा कि आत्मबोध के दो पक्ष राष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक होते हैं, आध्यात्मिक पक्ष से ही राष्ट्रीय विचारधारा का एवं राष्ट्रीय पक्ष से ही अपने स्वराष्ट्र का बोध होता है,इन्हीं दोनों के आत्मबोध से ही राष्ट्र विश्वगुरु बनेगा, इस अवसर पर प्रांत महामंत्री विजय प्रकाश ने कहा कि भौतिक एवं आर्थिक सुखों से हटकर युवाओं को कार्य करना चाहिए, जिसमें नैतिक, संस्कारिक आदि का समावेश हो, एक बेहतर राष्ट्र की संकल्पना ही आत्मबोध से विश्वबोध को ओर ले जाती है,
कार्यक्रम के अध्यक्षता परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अशोक सिंह ने किया एवं संचालन प्रांत मंत्री इंद्रजीत यादव के द्वारा किया गया में श्री यादव ने कहा कि भारत के अंतर्मन में निहित भारतीय संस्कृति की परिणति ही आत्मबोध है पश्चिम ने हमारी सभ्यता के खान पान, रहन सहन, आचार व्यवहार ने कुठाराघात किया है, जिसका आत्मबोध करना आवश्यक है, गुलामी की वजह से हमारी मेधा समाप्त हो गई है, हमारी जिजीविषा ही भारतीय संस्कृति को संरक्षण प्रदान कर रही है, जो विश्वबोध की अनुभूति अवश्य रूप से कराएगी.
कार्यक्रम में रांची जिला के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री जयंती जी ने कहा कि आध्यात्म से आत्म एवं विश्व का बोध होता है,सत्य, धर्म, संबंध की परंपरा से ही व्यक्ति का आत्मबोध होता है, आत्मबोध की परिणति ही विश्वबोध करता है, कार्यक्रम का मंच संचालन चंदन प्रजापति ने एवं धन्यवाद ज्ञापन रांची जिला के महासचिव विशाल कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन किया कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महानगर कारवां दीपक पांडे अखिल भारतीय साहित्य परिषद, के उपाध्यक्ष डॉ प्रशांत कारण,विजय कुमार,अरुण कुमार झा,सदानंद सिंह यादव, कमाल खान,लक्ष्मीचंद दीक्षित,जयंत कुमार झा, प्रकाश बड़ाइक, आयुषी आकांक्षा, आनंद रोशन, अमन निराला झारखंड के सभी पदाधिकारी उपस्थित थे.
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