सत्यनारायण व्रत की कहानी: कैसे शुरु हुई सत्यनारायण की पूजा? जानिए महत्व...

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सत्यनारायण व्रत की कहानी: कैसे शुरु हुई सत्यनारायण की पूजा? जानिए महत्व...

सत्यनारायण व्रत की कहानी कैसे शुरु हुई सत्यनारायण की पूजा जानिए महत्व

सत्यनारायण व्रत की कहानी: हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के कई रुपो के बारें बताया गया है। और उनके कई नाम भी है। इसमें से विष्णु जी का एक नाम सत्यनारायण है। जो की पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। कई श्रद्धालु गुरुवार या पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण का व्रत, पूजन करते हैं और कथा भी सुनते हैं। लेकिन क्या आप जानते है इस परंपरा की शुरुआत कैसे हुई। अगर नहीं तो आइए आज हम आपको बताते हैं।

सत्यनारायण व्रत की कहानीसत्यानारयण की कथा सुनने से दूर होते है कष्ट

शास्त्रों के अनुसार, भगवान सत्यानारायण की पूरी विधि -विधान से पूजा करने और सच्चे मन से व्रत रखने से जग के पालन हार कहे जाने वाले श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। और जीवन में सुख - शांति बनी रहती है।

सत्यनारायण व्रत की कहानी: भगवान सत्यनारायण के नाम का क्या है अर्थ?

भगवान विष्णु को ही सत्यनारायण भगवान के रुप में पूजते है। सत्यनारायण नाम दो शब्दों से मिलकर बना होता है, जिसमें से 'सत्य का अर्थ है सच, जो आदि और अनंत है। वहीं नारायण का अर्थ है- जगत के पालनहार विष्णु। सरल शब्दों में कहें तो सत्य ही नारायण है। इस पूजा का विशेष महत्व होता है। और संसार में सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है और जो सत्य बोलते हैं और सत्यता की राह पर चलते है। उन पर भगवान विष्णु की कृपा होती है।

कैसे शुरु हुई सत्यनारयण की पूजा?

स्कंद पुराण के मुताबिक, एक बार देवर्षि नारद घूमते हुए मृत्युलोक (पृथ्वी) आ पहुंचे। यहां उन्होंने देखा कि- मनुष्य अपने-अपने कर्मों की वजह से बहुत दुख और पीड़ा झेल रहें है। यह देखकर नारद मुनि को मनुष्यों की चिंता होने लगी और वो सीधे क्षीर सागर में भगवान विष्णु की शरण में पहुंच गए और उन्होंने पालनहार श्री हरि से प्रार्थना की और कहा - 'हे प्रभु, पृथ्वी पर लोग बहुत दुखी हैं। क्या कोई ऐसा सरल उपाय है, जिससे उनके सभी कष्ट दूर हो जाएं?' पालनहार श्रीहरि ने नारद मुनि से कहा- 'हे नारद, जो मनुष्य सांसारिक सुखों को भोगना चाहता है और मृत्यु के बाद मोक्ष की इच्छा रखता है, उसे सच्चे मन से सत्यनारायण का व्रत और पूजन करना चाहिए। इस व्रत से कलयुग भक्तों को दुखो से छुटकारा मिलेगा। बताया जाता है कि- काशी के एक बहुत ही गरीब ब्राह्मण शतानंद ने सबसे पहले यह व्रत किया था। तब भगवान नारायण ने स्वयं एक वृद्ध ब्राह्मण का रूप धरकर उन्हें यह कथा सुनाई और पूजा करने की विधि बताई थी। इसके बाद में एक गरीब लकड़हारे ने भी इस पूजा को देखा और सत्य का संकल्प लिया, जिससे उसकी गरीबी दूर हो गई। उसके जीवन में सुख - समृद्धि आती है।

सत्यनारायण की पूजा से जीवन में आती है सुख और शांति

1. मान्यता है कि, सत्यनारायण का व्रत करने और कथा को सुनने मात्र से जीवन के दुखों का नाश होता है और घर में सुख - समृद्धि होती है। 2. विवाह, संतान प्राप्ति या गृह प्रवेश के समय सत्यनारायण की पूजा अवश्य करें। इससे घर में सुख - शांति बनी रहती है। 3. सत्यनारायण का व्रत और पूरी विधि-विधान से की गई पूजा मनुष्य को झूठ और अधर्म के मार्ग से हटाकर सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा देती है।
भगवान को इन चीजों का लगाया जाता है भोग
सत्यनारायण का व्रत रखते समय ध्यान रखे पंजीरी (भुना हुआ आटा और चीनी), मीठी पूरी ( गेंहू के आटे में गुड़ का घोल, कालीमिर्च डालकर आटालगाकर उसकी पूरियां बनाए), केले के फल और पंचामृत का विशेष महत्व होता है। इसका भोग लगाना बेहद शुभ माना जात है। बताया जाता है कि- 'कथा के बाद प्रसाद ग्रहण किए बिना जाना अधूरा माना जाता है, क्योंकि यह भगवान के प्रति श्रद्धा और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है।'

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