Bhool Chuk Maaf Movie Review: रोमांस, कॉमेडी और इमोशंस से भरी कहानी...

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Bhool Chuk Maaf Movie Review: रोमांस, कॉमेडी और इमोशंस से भरी कहानी...

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Urvashi’s Unique Bag Cannes 2025: उर्वशी का बैग बना चर्चा का विषय, वीडियों वायरल… आपको बता दें कि, फिल्म की लेंथ 2 घंटे 1 मिनट है।

कहानी: प्यार, सपने और एक सामाजिक संदेश...

फिल्म की कहानी बनारस के रंजन (राजकुमार राव) और तितली (वामिका गब्बी) की है, जो एक-दूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करते हैं और शादी के ख्वाब देख रहे हैं। तितली के परिवार की शर्त है कि रंजन को सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए। रंजन एक चालाकी से नौकरी पा भी लेता है, लेकिन शादी से पहले हालात ऐसे बनते हैं कि सबकुछ बदल जाता है। और शादी की ट्रेन पटरी से डगमगाती नजर आने लगती हैं। फिल्म का क्लाइमैक्स न सिर्फ भावुक है, बल्कि यह एक मजबूत सामाजिक संदेश भी देता है कि गलतियां जिंदगी का हिस्सा होती हैं और माफ करना ही असली समझदारी है।

राजकुमार राव का सहज अभिनय, सपोर्टिंग कास्ट की चमक...

राजकुमार राव हमेशा की तरह एक बार फिर अपने किरदार को पूरे शिद्दत से निभाते नजर आ रहें हैं। रंजन की मासूमियत, चालाकी और इमोशनल गहराई को उन्होंने बखूबी दिखाया है। वामिका गब्बी ने तितली के किरदार को सादगी और आत्मबल के साथ निभाया है। उनके और राजकुमार के बीच की केमिस्ट्री फ्रेश और विश्वसनीय लगती है।

फिल्म की स्टार कास्ट...

फिल्म के हिरो राजकुमार राव और वामिका गब्बी के अलावा संजय मिश्रा, सीमा पाहवा, रघुबीर यादव और जाकिर हुसैन जैसे अनुभवी कलाकार फिल्म में मनोरंजन और भावनात्मक वजन दोनों जोड़ते हैं। इनकी मौजूदगी फिल्म के कई दृश्यों को यादगार बना देती है।

डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले...

निर्देशक करण शर्मा ने एक साधारण कहानी को दिल से कहने की कोशिश की है। लेकिन स्क्रीनप्ले में कसावट की कमी साफ नजर आती है। इंटरवल से पहले फिल्म कुछ जगहों पर खिंचती हुई लगती है और दर्शक का ध्यान भटकने लगता है। इंटरवल के बाद जरूर कुछ मजेदार मोड़ आते हैं, लेकिन अंत आते-आते फिल्म थोड़ी प्रीची यानी उपदेशात्मक लगने लगती है। बनारस को लोकेशन के तौर पर दिखाने की कोशिश अच्छी थी, लेकिन भाषाई असंगति (कभी अवधी, कभी बुंदेलखंडी) और माहौल की गहराई न होने के कारण वह पूरी तरह प्रभावित नहीं कर पाती।

म्यूजिक की बात करें तो...

फिल्म के गाने ‘टिंग लिंग सजना’ और ‘चोर बाजारी फिर से’ स्क्रिप्ट में घुलने की कोशिश करते हैं, लेकिन गाने में ज्यादा मजा नहीं आया। संगीत न तो भावनात्मक दृश्यों को ऊपर उठाता है और न ही दर्शकों के मन में कोई खास छाप छोड़ता है। कुल मिलाकर, म्यूजिक फिल्म की कमजोर कड़ी बन जाता है।

फाइनल रिव्यू...

अगर आप दिनेश विजन और मैडॉक फिल्म्स के फैन हैं, या फिर आपको हल्की-फुल्की पारिवारिक फिल्में पसंद हैं जिनमें इमोशन हो, ह्यूमर हो और एक सरल लेकिन दिल को छू जाने वाला मैसेज हो — तो ‘भूल चूक माफ’ एक बार देखा जा सकता है। हालांकि, अगर आप ठोस कहानी और संगीत के शौकीन हैं, तो इस फिल्म को OTT पर देखने का इंतजार करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

कुछ खास रिव्यू नहीं...

लोगों की मिली जुली प्रतिक्रिया मिली है, किसी ने फिल्म की तारीफ की तो कुछ लोगों ने बोरिंग बताया।

एक यूजर ने लिखा कि-

फिल्म बिना किसी कहानी के बहुत ही खींची हुई लगती है। पूरी कहानी 15 मिनट में खत्म हो सकती थी, बाकी समय एक उबाऊ दोहराव जैसा लगता है। कॉमेडी के बहुत कम पंच, सामान्य संवाद, #वामीका गब्बी को अपनी संवाद अदायगी पर बहुत काम करने की जरूरत है और #राजकुमार राव सिर्फ़ एक औसत अभिनय करते हैं। कुल मिलाकर #भूलचुकमाफ एक खराब फिल्म है.. मत देखिए

एक ने लिखा कि-

सांस्कृतिक बारीकियां फिल्म में क्षेत्रीय स्वाद, रीति-रिवाज़ और बोलचाल की भाषा का इस्तेमाल किया गया है जो प्रामाणिकता और आकर्षण जोड़ता है। यह जड़ से जुड़ा हुआ है, फिर भी सार्वभौमिक है।

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