सेंसेक्स दो दिन की गिरावट से उभरा ; आरबीआई के फॉरेक्स स्वैप कदम और ईरान-इज़राइल के बीच हमले रुकने से बैंकिंग शेयरों में उछाल, कच्चा तेल नरम पड़ा
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मंगलवार को दलाल स्ट्रीट पर तीन महत्वपूर्ण घटनाओं ने एक साथ असर दिखाया और बाज़ार का मूड बदला — भारतीय रिज़र्व बैंक का विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने का साहसिक नीतिगत कदम, ईरान और इज़राइल के बीच सीधे सैन्य हमलों में अस्थायी विराम की घोषणा, और कच्चे तेल की कीमतों में इंट्राडे ऊंचाई से राहत। इन तीनों कारकों ने मिलकर बाज़ार को दो दिन की लगातार गिरावट से उबारा और निवेशकों को अल्पकालिक सांत्वना दी। हालांकि विश्लेषकों ने आगाह किया कि यह राहत अभी नाजुक और संकीर्ण आधार पर टिकी है।
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भारतीय बाज़ार
बीएसई सेंसेक्स 394.50 अंकों यानी 0.54% की बढ़त के साथ 73,918.76 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 119.10 अंक यानी 0.52% चढ़कर 23,242.10 पर बंद हुआ। व्यापक बाज़ार ने प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। पीएसयू बैंक, प्राइवेट बैंक और वित्तीय सेवाओं के शेयरों ने बढ़त का नेतृत्व किया, जबकि आईटी और मीडिया शेयरों में सुधार देखा गया।
सत्र की सबसे चर्चित कहानी सरकारी बैंकों की जोरदार उछाल रही। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 3.62% उछलकर 8,496.60 पर पहुंचा। बैंक ऑफ बड़ौदा 5.59%, बैंक ऑफ महाराष्ट्र 5.48%, बैंक ऑफ इंडिया 5.45%, पंजाब एंड सिंड बैंक 4.4%, और केनरा बैंक 4.25% ऊपर रहे। निजी बैंकिंग में आईसीआईसीआई बैंक 1.89% और एक्सिस बैंक 2.07% चढ़े, जबकि इंडसइंड बैंक ने 3.35% की बढ़त के साथ सेंसेक्स गेनर्स में शीर्ष स्थान हासिल किया। एसबीआई जनरल इंश्योरेंस लिस्टिंग की खबरों के बीच एसबीआई 2.1% ऊपर रहा, और बजाज फाइनेंस ने 1.8% की बढ़त दर्ज की। ब्रोकरेजों की सकारात्मक दीर्घकालिक रेटिंग पर इंडिगो 4% उछला। दूसरी ओर टाइटन 2.20%, एनटीपीसी 1.82% और पावर ग्रिड 1.65% गिरे।
बैंकिंग क्षेत्र की उछाल के पीछे आरबीआई का एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम था। भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य वित्तीय प्रणाली में अधिक विदेशी डॉलर आकर्षित करना है। इस कदम से बैंकों पर विदेशी मुद्रा धारण की लागत कम होगी, फंडिंग लागत घटेगी और तरलता की स्थिति मजबूत होगी।
आरबीआई एमपीसी जून 2026 का फैसला — रेपो दर 5.25% पर स्थिर
भारतीय रिज़र्व बैंक ने सोमवार को तीन से पांच साल की मैच्योरिटी वाली नई एफसीएनआर(बी) जमाओं के लिए अमेरिकी डॉलर-रुपया फॉरेक्स स्वैप सुविधा शुरू की। बैंक इस सुविधा के तहत 30 सितंबर 2026 तक किसी भी स्वतंत्र रूप से परिवर्तनीय मुद्रा में जमाएं जुटा सकते हैं, हालांकि स्वैप केवल अमेरिकी डॉलर में ही उपलब्ध होगा। यह स्वैप सुविधा तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और 16 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी।
आरबीआई सरकारी कंपनियों को एक रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा भी दे रहा है, जिससे वे प्रचलित बाज़ार दर के लगभग आधे पर — 1.5% प्रति वर्ष की निश्चित दर पर — अपने विदेशी उधार की हेजिंग कर सकेंगी।
3 से 5 जून 2026 के बीच आयोजित एमपीसी की दूसरी द्वि-मासिक नीति बैठक के बाद, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में, केंद्रीय बैंक ने पश्चिम एशिया में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच रेपो दर को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने और तटस्थ नीतिगत रुख बनाए रखने का फैसला किया। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि भारत बाहरी झटकों से निपटने के लिए अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में है।
रेपो दर स्थिर रखने का निर्णय अपेक्षित था, लेकिन तरलता प्रबंधन और विदेशी मुद्रा के सक्रिय उपायों के साथ बाज़ार ने इसे व्यापक रूप से सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है। 2025 की शुरुआत से कई बार दरें घटाने के बाद अब रेपो दर 5.25% पर आ चुकी है — यानी दरों में कटौती की गुंजाइश सीमित है, और ऐसे में आरबीआई के विदेशी मुद्रा बाज़ार हस्तक्षेप और अन्य नीतिगत उपाय और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
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एशियाई बाज़ार
मंगलवार को एशियाई बाज़ारों ने सोमवार की तीव्र गिरावट के बाद स्थिरता की ओर कदम बढ़ाने का प्रयास किया। ईरान-इज़राइल के बीच सीधे सैन्य हमलों में विराम और सेमीकंडक्टर शेयरों में आंशिक वापसी ने धारणा को सहारा दिया।
एशियाई शेयर बाज़ारों ने मंगलवार को स्थिरता की कोशिश की और कच्चे तेल की कीमतें अपने ऊंचे स्तरों से नीचे आईं, जब इज़राइल और ईरान ने अस्थायी रूप से एक-दूसरे पर हमले रोकने की घोषणा की। साथ ही निवेशकों ने सेमीकंडक्टर शेयरों में ताजी गिरावट पर खरीदारी की। हालांकि विश्लेषकों ने आगाह किया कि यह उछाल आधार की दृष्टि से संकीर्ण था, सोमवार रात एसएंडपी 500 के भीतर 60% शेयर लाल निशान में बंद हुए, भले ही समग्र सूचकांक मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।
सोमवार का सत्र बेहद कठिन रहा था। जापान के निक्केई 225 ने 4.08% की गिरावट के साथ 63,869.50 पर बंद होकर एशिया में सबसे बड़ा नुकसान उठाया, हांगकांग का हैंग सेंग 1.57% लुढ़ककर 24,570.61 पर आया, और इंडोनेशिया का जेएसएक्स कंपोजिट 4.20% धराशायी होकर 5,594.77 पर बंद हुआ। बेरूत पर ताजी इज़राइली हवाई हमलों और जवाबी ईरानी मिसाइल हमलों ने रात भर जोखिम उठाव की भावना को कमजोर किया।
सोमवार को दक्षिण कोरिया का कोस्पी 8.29% लुढ़क गया और इस साल दूसरी बार सर्किट ब्रेकर लगाना पड़ा। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स 10.2% और एसके हाइनिक्स 7.6% गिरे। इस इंडेक्स ने 2026 के अपने शानदार सालाना लाभ का एक बड़ा हिस्सा एक ही सत्र में गंवा दिया। मंगलवार को कोस्पी ने सोमवार की गिरावट से आंशिक वापसी की, जो साप्ताहिक बाज़ार की अति-बिक्री (ओवरसोल्ड) स्थिति का संकेत देती है।
एशियाई बाज़ारों में इस सप्ताह के उग्र उतार-चढ़ाव यह साफ बताते हैं कि ईरान संघर्ष का जोखिम अभी भी बाइनरी बना हुआ है। जो बाज़ार मई के आखिर में शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद में एआई उत्साह और तकनीकी कंपनियों की मजबूत कमाई के दम पर नई ऊंचाइयां छू रहे थे, उन्हें एक ही सप्ताहांत में कड़ी याद दिलाई गई कि भू-राजनीति सबसे मजबूत बुनियादी कारकों को भी एक झटके में दरकिनार कर सकती है।
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अमेरिकी बाज़ार
वॉल स्ट्रीट अप्रैल 2025 के बाद से सबसे खराब सप्ताह से उबरने की कोशिश कर रहा है। एक शक्तिशाली अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट और ईरान-इज़राइल के बीच फिर भड़की हिंसा ने मिलकर तकनीकी शेयरों पर दोहरा प्रहार किया।
शुक्रवार, 6 जून को नैस्डैक कंपोजिट में भारी गिरावट आई। तकनीकी शेयरों से भरपूर यह सूचकांक 4.18% लुढ़ककर 25,709.43 पर बंद हुआ — यह अप्रैल 2025 के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट थी। एसएंडपी 500 में 2.64% की कमी आई और यह 7,383.74 पर बंद हुआ, जबकि डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 695.15 अंक गिरा। यह गिरावट मई के लिए गैर-कृषि पेरोल डेटा के बाद आई जिसमें 1,72,000 नई नौकरियां जुड़ीं — अर्थशास्त्रियों के 80,000 के अनुमान से कहीं अधिक। 10 साल के ट्रेजरी यील्ड 4.5% के ऊपर और 30 साल के यील्ड 5% के पार जा पहुंचे, जिससे एआई निर्माण में लगी कंपनियों पर बढ़ती उधारी लागत की चिंता फिर से सामने आई।
सोमवार, 8 जून को एसएंडपी 500 ने 0.30% की बढ़त के साथ 7,405.73 पर वापसी की। नैस्डैक 0.86% चढ़कर 25,929.66 पर बंद हुआ क्योंकि चिप शेयरों ने शुक्रवार की गिरावट की कुछ भरपाई की। डाउ जोन्स 80.77 अंक यानी 0.16% गिरकर 50,786.01 पर बंद हुआ। माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयर शुक्रवार की 13% गिरावट के बाद लगभग 10% सुधरे, जबकि एनवीडिया और ब्रॉडकॉम भी हरे निशान में रहे।
मजबूत रोजगार रिपोर्ट — जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है — बाज़ारों के लिए उलटी साबित हुई क्योंकि इसने इस साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना को जीवित कर दिया। एआई ट्रेड, जिसने मई भर सूचकांकों को रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड दिलाए, अब एक जटिल व्यापक आर्थिक पृष्ठभूमि से जूझ रहा है — मजबूत विकास का अर्थ है फेड लंबे समय तक ऊंची दरें बनाए रखेगा, जो ऊंचे मूल्यांकन वाले तकनीकी शेयरों पर दबाव बनाता है। मंगलवार के अमेरिकी सत्र के आंकड़े और फ्यूचर्स की चाल बताएगी कि यह रिबाउंड टिकाऊ है या महज तकनीकी ओवरसोल्ड पोजीशनिंग की वापसी।
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कच्चा तेल
मंगलवार को ऊर्जा बाज़ारों ने दिन के सबसे महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेत दिए, जब कच्चे तेल की कीमतें ईरान-इज़राइल के बीच सीधे हमलों में विराम के बाद सार्थक रूप से नरम पड़ गईं — जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी राहत की सांस बनकर आई।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.9% गिरकर 93.30 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.2% लुढ़ककर 90.20 डॉलर प्रति बैरल पर आया। यह नुकसान ईरान और इज़राइल के बीच हमलों में ठहराव की खबरों के बाद आया, जिससे मध्य-पूर्व से तेल आपूर्ति में तत्काल रुकावट की आशंका घटी।
इससे पहले के सत्र में कीमतें 5% तक उछल गई थीं क्योंकि इज़राइल के ईरान पर ताजे हमलों और लेबनान में हिंसा ने युद्ध के जल्द समाप्त होने की उम्मीदें धूमिल कर दी थीं। हालांकि ईरानी सशस्त्र बलों द्वारा इज़राइल के खिलाफ सैन्य अभियान समाप्त करने की घोषणा के बाद कीमतें वापस आ गईं। "हालिया हमलों में विराम से कुछ राहत तो है, लेकिन निवेशक आश्वस्त नहीं हैं कि यह रुकावट टिकेगी," केसीएम ट्रेड के मुख्य बाज़ार विश्लेषक टिम वाटरर ने कहा।
इसके अलावा, ओपेक+ ने मध्य-पूर्व से जारी आपूर्ति जोखिमों के बावजूद जुलाई के लिए 1,88,000 बैरल प्रतिदिन का अतिरिक्त उत्पादन कोटा बढ़ाने को मंजूरी दी। साथ ही ताजे आंकड़ों से चीन के आयात में तेज गिरावट का संकेत मिला, क्योंकि एशिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता संघर्ष की शुरुआत से ही विदेशी आपूर्ति के बजाय घरेलू भंडार पर निर्भर रहा है — जो वैश्विक आपूर्ति संतुलन को निकट भविष्य में कुछ राहत दे रहा है।
भारत के लिए ब्रेंट का 93.30 डॉलर का स्तर इस सप्ताह की शुरुआत में देखे गए 97–98 डॉलर के मुकाबले काफी बेहतर है, लेकिन फरवरी 2026 से पहले के 65–70 डॉलर के दायरे से अभी भी बहुत ऊपर है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है — ये दरें सीधे परिवहन लागत, खाद्य कीमतों और व्यापक खुदरा महंगाई को प्रभावित करती हैं।
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भारत में सोना और चांदी के भाव
मंगलवार को कीमती धातुओं ने एक अलग तस्वीर पेश की — सोना आठ दिनों की गिरावट से उबरा जबकि चांदी के भाव लगभग स्थिर रहे।
भारत में 9 जून 2026 को सोने के भाव आठ दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए चढ़े। 24 कैरेट सोने का भाव 100 ग्राम पर 14,700 रुपये और 22 कैरेट सोने का भाव 13,500 रुपये बढ़ा। चांदी के भाव में ज्यादा बदलाव नहीं आया। एमसीएक्स पर 5 अगस्त कंट्रैक्ट का सोना 0.05% की मामूली गिरावट पर रहा, जबकि 3 जुलाई कंट्रैक्ट की चांदी 2,44,831 रुपये प्रति किलोग्राम पर थी, जो सत्र के दौरान लगभग 1,558 अंक यानी 0.63% ऊपर थी।
9 जून 2026 को भारत में 24 कैरेट सोने की खुदरा कीमत लगभग 14,596 रुपये प्रति ग्राम और 22 कैरेट सोना लगभग 13,379 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है। चांदी घरेलू बुलियन बाज़ार में लगभग 2,44,900 रुपये प्रति किलोग्राम के करीब है। सोमवार को एमसीएक्स पर सोना 1,53,428 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी 2% से अधिक गिरकर 2,42,151 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई थी।
मौजूदा खुदरा भावों में आज की तेजी और एमसीएक्स फ्यूचर्स कीमत के बीच का अंतर बुलियन बाज़ार की जटिल स्थिति को दर्शाता है। घरेलू सोने के भाव साल भर पहले की तुलना में अभी भी उल्लेखनीय रूप से ऊंचे हैं — ईरान संघर्ष से उपजे भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम, रुपये की गिरावट और लगातार सुरक्षित निवेश की मांग इसकी वजह है। मौजूदा स्तरों पर सोने को 4,300–4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के बीच वैश्विक स्तर पर मजबूत समर्थन मिलने की उम्मीद है।
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मुद्रा बाज़ार — रुपया और प्रमुख मुद्राएं
मंगलवार को भारतीय रुपये को आरबीआई की नई फॉरेक्स स्वैप सुविधा और कच्चे तेल के दबाव में तत्काल कमी से अस्थायी समर्थन मिला, हालांकि मुद्रा संघर्ष-पूर्व के स्तरों से अभी भी काफी नीचे बनी हुई है।
9 जून 2026 को अमेरिकी डॉलर-रुपया विनिमय दर लगभग 95.33 रुपये प्रति डॉलर पर है। 19 मई 2026 को यह 96.57 के साल के उच्च स्तर तक पहुंचा था। पिछले बारह महीनों में यूएसडी/आईएनआर दर में 11.58% की वृद्धि हुई है।
यूरो 9 जून को लगभग 110.10 रुपये प्रति यूरो पर कारोबार कर रहा है। पिछले एक साल में आईएनआर/यूरो दर में 11.24% की गिरावट आई है। जापानी येन 0.5987 रुपये प्रति येन पर है। ब्रिटिश पाउंड 128.20–128.54 रुपये के दायरे में कारोबार कर रहा है। यूएई दिरहम लगभग 25.97 रुपये प्रति दिरहम पर है — यह दर भारत के बड़े खाड़ी प्रवासी समुदाय और प्रेषण गलियारे के लिए बेहद अहम है।
आरबीआई की यूएसडी-आईएनआर फॉरेक्स स्वैप सुविधा के तहत, घरेलू बैंक न्यूनतम एक मिलियन डॉलर के गुणकों में केंद्रीय बैंक को अमेरिकी डॉलर बेच सकते हैं और साथ ही स्वैप अवधि के अंत में उसी राशि को वापस खरीदने का समझौता कर सकते हैं। इससे बैंकों पर विनिमय दर का जोखिम पूरी तरह समाप्त हो जाता है। यह सुविधा विनिमय दर जोखिम को खत्म कर बैंकों को बहु-वर्षीय विदेशी पूंजी जुटाने और घरेलू रुपया तरलता बढ़ाने में सक्षम बनाएगी।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम जून भर रुपये को 94–96 के दायरे में समर्थन दे सकता है — बशर्ते कच्चा तेल 95 डॉलर से नीचे रहे और ईरान-इज़राइल विराम टिकाऊ साबित हो।
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सप्ताह का संदर्भ: असाधारण उठापटक का सप्ताह
यह सप्ताह 2026 के सबसे उतार-चढ़ाव वाले सप्ताहों में से एक रहा है। सोमवार की बड़ी गिरावट — ईरान द्वारा मई के अंत में बनाए गए युद्धविराम ढांचे के बाद पहली बार इज़राइल पर हमला करने से — ने सियोल से मुंबई और वॉल स्ट्रीट तक वैश्विक बाज़ारों को हिला दिया।
संघर्ष के 100वें दिन ईरान-इज़राइल शत्रुता की पुनः शुरुआत मई के अंत में युद्धविराम की घोषणा के बाद से भारत के लिए सबसे गंभीर भू-राजनीतिक घटना है। मई के ढांचे ने वास्तविक राहत दी थी — तेल 88–90 डॉलर पर वापस आ गया था, एफआईआई प्रवाह में सुधार हुआ था, और आरबीआई ने दर कटौती की गुंजाइश का संकेत देना शुरू किया था। ईरान और इज़राइल के बीच सक्रिय सैन्य आदान-प्रदान की वापसी उस पूरी प्रगति को पलटने का खतरा पैदा करती है।
बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा की ताजा टिप्पणियों को जून में ब्याज दर बढ़ाने की बढ़ती संभावना के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने कहा कि ऊर्जा कीमतों से बढ़ रही मुद्रास्फीति से निपटना प्राथमिकता होनी चाहिए। बीओजे द्वारा दर बढ़ाने से येन मजबूत होगा और संभवतः कैरी-ट्रेड अनवाइंडिंग होगी जो उभरते बाज़ार की परिसंपत्तियों पर दबाव डाल सकती है।
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आगे की राह
बुधवार का सत्र दो अहम चर पर निर्भर करेगा — ईरान-इज़राइल हमलों में विराम की टिकाऊपन, और शुक्रवार की मजबूत रोजगार रिपोर्ट के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व या उसके अधिकारियों द्वारा ब्याज दरों पर आने वाले संकेत।
यदि दोनों मोर्चों पर स्थिति अनुकूल रही — ईरान-इज़राइल तनाव न बढ़े और फेड की भाषा संयमित रहे — तो भारतीय बाज़ारों के पास आगे की रिकवरी की बुनियाद है, जिसमें निफ्टी 23,400–23,500 के बैंड को फिर से हासिल करने का प्रयास कर सकता है। रुपये के लिए आरबीआई की नई फॉरेक्स स्वैप सुविधा निकट भविष्य में एक मजबूत समर्थन स्तंभ प्रदान करती है, हालांकि तेल की कीमतों का 96–98 डॉलर की ओर कोई भी उलटाव इस बफर को जल्दी खत्म कर सकता है।
सोना वैश्विक स्तर पर 4,300–4,500 डॉलर प्रति औंस के दायरे में समेकन के दौर से गुजर रहा है। इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी सीपीआई और पीपीआई डेटा से इसकी अगली दिशा का स्पष्ट संकेत मिलेगा।
भारत की मध्यम अवधि की संरचनात्मक कहानी — वित्त वर्ष 2026 में 7.7% जीडीपी वृद्धि, एक सक्रिय केंद्रीय बैंक, और तेजी से बढ़ता घरेलू उपभोग आधार — अपनी जगह बरकरार है। लेकिन निकट भविष्य में दलाल स्ट्रीट घरेलू बुनियादी कारकों से उतना नहीं चलेगी जितना तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक समाचारों से। सतर्कता, विविधीकरण और अनुशासित पोजीशनिंग आने वाले दिनों का मूलमंत्र है।
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*सभी आंकड़े मंगलवार, 9 जून 2026 के बाज़ार बंद होने के समय और इंट्राडे अपडेट पर आधारित हैं। अमेरिकी बाज़ार का डेटा सोमवार, 8 जून 2026 के क्लोज़ और मंगलवार के प्री-मार्केट गतिविधि को संदर्भित करता है। आरबीआई नीति विवरण 3–5 जून 2026 की एमपीसी बैठक और 5 जून 2026 को घोषित निर्णय को संदर्भित करता है। जिंस और मुद्रा मूल्य संकेतात्मक हैं और प्रकाशित बाज़ार डेटा प्लेटफॉर्म से लिए गए हैं। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।*