भारत और मालदीव के रिश्तों में बदलाव
भारत और मालदीव के बीच ऐतिहासिक और गहरे रिश्ते हैं जो समय के साथ और भी मजबूत होते जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुहिज्जू की हालिया मुलाकात ने दोनों देशों के बीच सहयोग और साझेदारी को नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। इस मुलाकात में कई अहम फैसले लिए गए, जो दोनों देशों के सामरिक, आर्थिक और डिजिटल रिश्तों को मजबूती देंगे।
भारत और मालदीव के बीच नए समझौते
प्रधानमंत्री मोदी ने मालदीव दौरे पर अपनी यात्रा के दौरान कहा कि भारत और मालदीव के रिश्ते "इतिहास से भी पुराने" हैं और "समुद्र की गहराई जितने गहरे हैं"। यह बयान भारतीय विदेश नीति में 'पड़ोसी पहले' और 'महासागर दृष्टिकोण' की अहमियत को दर्शाता है।
मुहिज्जू के साथ संवाद में मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत हमेशा मालदीव का सबसे भरोसेमंद दोस्त रहा है, चाहे प्राकृतिक आपदाएं हों या महामारी, भारत ने हर मुश्किल घड़ी में मालदीव का साथ दिया है। खासकर कोविड-19 के बाद भारत ने मालदीव को आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति करने में मदद की और आर्थिक सुधार में सहायक भूमिका निभाई।
4,850 करोड़ का लोन और व्यापारिक समझौते
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मुहिज्जू के बीच हुई वार्ता में कई महत्वपूर्ण समझौते हुए। भारत ने मालदीव को 4,850 करोड़ रुपये का ऋण देने की घोषणा की। इसके साथ ही, दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को बढ़ाने के लिए कई समझौते किए।
इनमें से एक अहम निर्णय था मालदीव के वार्षिक कर्ज़ चुकाने की राशि को 40% तक घटाना, जिससे मालदीव की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इसके अलावा, भारत और मालदीव के बीच एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की शुरुआत भी जल्द होने वाली है।
डिजिटल और सामुद्रिक सुरक्षा में सहयोग
वार्ता में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा था डिजिटल और सामुद्रिक सुरक्षा का। भारत ने मालदीव के साथ UPI, RUPAY कार्ड और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही, दोनों देशों ने भारतीय डिजिटल समाधानों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का निर्णय लिया, जिससे मालदीव में डिजिटल और पर्यटन उद्योग को बल मिलेगा।
वहीं, भारत और मालदीव के बीच समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर भी चर्चा की गई, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर। दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
समझौतों की पूरी सूची
प्रधानमंत्री मोदी के इस यात्रा के दौरान कुछ प्रमुख समझौते हुए, जिनमें शामिल हैं:
- 4,850 करोड़ रुपये के लोन की घोषणा
- मालदीव के वार्षिक कर्ज़ चुकाने में 40% की कमी
- भारत-मालदीव मुक्त व्यापार समझौते (IMFTA) पर बातचीत शुरू
- UPI नेटवर्क के लिए समझौता
- मछली पालन और जलवायु विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग
- भारत द्वारा मालदीव में 3,300 सामाजिक आवास इकाइयों का निर्माण
- 60वीं सालगिरह पर भारतीय और मालदीवी डिप्लोमेटिक रिश्तों पर समर्पित डाक टिकट जारी
भारत-मालदीव के रिश्ते: भविष्य की दिशा
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि भारत-मालदीव दोस्ती हमेशा उज्जवल और स्थिर रहेगी। उनका मानना है कि दोनों देशों के लिए यह दोस्ती न केवल एक आवश्यक राजनीतिक समझौता है, बल्कि यह एक साझा यात्रा है, जो दोनों के विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ रही है।
राष्ट्रपति मुहिज्जू ने भी भारत के योगदान की सराहना की और कहा कि भारत का समर्थन मालदीव के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर जब वह अपने आर्थिक संकटों से उबरने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के निरंतर समर्थन से मालदीव के लिए हर चुनौती का सामना करना आसान हुआ है।
कंबोडिया और चीन का बढ़ता प्रभाव
हालांकि भारत और मालदीव के रिश्ते मजबूत हो रहे हैं, लेकिन चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर दोनों देशों के बीच चिंता भी देखी जा रही है। दोनों देशों ने इस मुद्दे पर चर्चा की और यह तय किया कि उन्हें अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक रूप से काम करना होगा।