मध्य प्रदेश को आर्थिक राहत

3 दशक पुराना विवाद खत्म: गुजरात समझौते से MP को 1268 करोड़ की बचत, अब सिर्फ 231.80 करोड़ देगा मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश सरकार ने नर्मदा और सरदार सरोवर परियोजना के विवाद को सुलझाकर 1268 करोड़ रुपये की बचत की है, जिससे राज्य को भारी आर्थिक राहत मिली है।

3 दशक पुराना विवाद खत्म: गुजरात समझौते से MP को 1268 करोड़ की बचत, अब सिर्फ 231.80 करोड़ देगा मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश सरकार ने नर्मदा एवं सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े करीब तीन दशक पुराने आर्थिक विवाद का समाधान कर बड़ी राहत हासिल की है। गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच हुए समझौते के बाद अब राज्य पर पड़ने वाला भारी आर्थिक बोझ कम हो गया है। इस समझौते से मध्य प्रदेश को करीब 1268 करोड़ रुपये की सीधी बचत हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस समझौते को प्रदेश के हित में बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित पुनर्वास और दोबारा बसाहट व्यय के विवाद को सभी राज्यों की सहमति से सुलझाया गया है।

1500 करोड़ की देनदारी से मिली राहत

दरअसल, इस विवाद के समाधान के लिए पहले तय किए जा रहे फॉर्मूले के अनुसार मध्य प्रदेश पर करीब 1500 करोड़ रुपये की देनदारी आने की संभावना थी। लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल और चारों राज्यों के बीच बनी सहमति के बाद खर्च में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी को कम कर दिया गया।

नए समझौते के तहत अब मध्य प्रदेश को गुजरात को 1500 करोड़ रुपये के बजाय सिर्फ 231.80 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। राज्य की हिस्सेदारी को 31.98 प्रतिशत से घटाकर 16.17 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी बदलाव के कारण प्रदेश के खजाने पर पड़ने वाला करीब 1268 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार खत्म हो गया है।

किसानों और शहरों को मिलेगा फायदा

सरदार सरोवर परियोजना मध्य प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस परियोजना के माध्यम से प्रदेश की करीब 31 लाख हेक्टेयर कृषि भूम को सिंचाई सुविधा मिल रही है। इससे मालवा और निमाड़ क्षेत्र के हजारों किसानों को लाभ पहुंच रहा है।

इसके अलावा नर्मदा जल के जरिए जबलपुर, कटनी, देवास, उज्जैन, इंदौर और धार सहित कई शहरों में पेयजल और उपयोगी जल की आपूर्ति की जा रही है।

उद्योगों के लिए भी अहम परियोजना

सरदार सरोवर परियोजना प्रदेश के औद्योगिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पीथमपुर, देवास और विक्रम उद्योगपुरी जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों को भी इसी परियोजना से जल उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे उद्योगों के संचालन और विस्तार को गति मिल रही है।

राज्य सरकार का कहना है कि यह समझौता आर्थिक राहत के साथ-साथ प्रदेश के विकास और जल प्रबंधन के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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