मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर के साथ विस्तारपूर्वक चर्चा की। बैठक में निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) अपशिष्ट प्रबंधन, ठोस कचरा प्रबंधन, परिपत्र अर्थव्यवस्था एवं संसाधन पुनर्प्राप्ति, सतत पर्यटन, कचरा-मुक्त पर्यटन स्थलों के विकास, जलवायु-अनुकूल शहरी विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित परिवर्तन, डिजिटल गवर्नेंस तथा स्मार्ट सिटी जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
क्या बोले CM?
CM सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश और नॉर्वे प्राकृतिक संरक्षण के साथ सतत विकास के साझा दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रहे हैं। दोनों के बीत सहयोग से ऐसे नवाचारपूर्ण समाधान विकसित होंगे, जो न केवल हिमाचल बल्कि विश्व के अन्य पर्वतीय क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होंगे।
नॉर्वे के साथ सहयोग की संभावनाएं
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश निर्माण और विध्वंस मलबे के प्रबंधन एवं पुनर्चक्रण के क्षेत्र में नॉर्वे की विशेषज्ञता, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और उन्नत प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाएगा। राज्य सरकार सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में नॉर्वे के साथ सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने नॉर्वे की कंपनियों को हिमाचल प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए पर्यटन, हरित ऊर्जा और भू-तापीय ऊर्जा क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।
कृषि तंत्र को बढ़ावा
CM सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार रसायनमुक्त प्राकृतिक खेती को भी प्रोत्साहित कर रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और मजबूत कृषि तंत्र को बढ़ावा देने के लिए किसानों को मक्की, गेहूं, और कच्ची हल्दी पर न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया जा रहा है। शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह, महापौर सुरेंद्र चौहान, मुख्य सचिव KK पंत, प्रधान सचिव देवेश कुमार, निदेशक शहरी विकास नीरज चड्ढा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।