मध्यप्रदेश ने इस बार गेहूं खरीदी में नया रिकॉर्ड बनाते हुए देशभर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद के मामले में प्रदेश ने पंजाब और हरियाणा जैसे पारंपरिक कृषि राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है।
राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक शनिवार रात तक प्रदेश में 10 लाख से ज्यादा किसानों से 63 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। यह अब तक का बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है।
100 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य
प्रदेश सरकार ने इस बार 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा रहा है।सरकार का दावा है कि खरीदी प्रक्रिया तेज गति से चल रही है और अंतिम तारीख तक लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
19 लाख किसानों ने कराया पंजीयन
राज्य में गेहूं बेचने के लिए करीब 19 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। अभी तक 10 लाख किसान समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेच चुके हैं।सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि तय कोटा पूरा होने के बाद भी किसान गेहूं बेचने से वंचित रह जाते हैं तो खरीदी की अंतिम तारीख बढ़ाई जा सकती है।
इन संभागों में पहले शुरू हुई खरीदी
प्रदेश के भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन और इंदौर संभाग में गेहूं खरीदी 9 अप्रैल से शुरू कर दी गई थी। जबकि अन्य संभागों में खरीदी प्रक्रिया बाद में शुरू हुई।खरीदी केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। सरकार का कहना है कि किसानों को समय पर भुगतान और सुविधाएं देने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
किसानों को क्या फायदा?
विशेषज्ञों के मुताबिक रिकॉर्ड स्तर पर गेहूं खरीदी होने से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का सीधा लाभ मिल रहा है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।प्रदेश में बेहतर उत्पादन, अनुकूल मौसम और सरकारी खरीद व्यवस्था को इस रिकॉर्ड की बड़ी वजह माना जा रहा है।