पंढरपुर का विट्ठल मंदिर

Vitthal Rukmini Mandir: एक ऐसा मंदिर जहां भगवान ने किया था भक्त का इंतजार, फिर वहीं हो गए विराजमान

पंढरपुर का विट्ठल मंदिर, जहां भगवान श्रीकृष्ण विट्ठल रूप में और उनकी पत्नी रुक्मिणी विराजमान हैं, भक्ति की महान शक्ति का प्रतीक है।

By : हेमा गुप्ता
Vitthal Rukmini Mandir: एक ऐसा मंदिर जहां भगवान ने किया था भक्त का इंतजार, फिर वहीं हो गए विराजमान

Vitthal Rukmini Mandir: एक ऐसा मंदिर जहां भगवान ने किया था भक्त का इंतजार, फिर वहीं हो गए विराजमान

Vitthal Rukmini Mandir: महाराष्ट्र के पंढरपुर में भगवान श्रीकृष्ण विट्ठल रुप में विराजमान हैं। इस मंदिर में विट्ठल भगवान के साथ उनकी पत्नी रुकमणी माता विराजमान हैं।   यहां भगवान विट्ठल ईंट पर खड़े हुए दोनों हाथ कमर पर रखे भक्त पुंडलिक की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह मंदिर भक्ति और समर्पण का अनुपम प्रतीक है।

मंदिर का इतिहास

मंदिर की स्थापना 11वीं शताब्दी में हुई थी। मुख्य मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में देवगिरी के यादव शासकों ने करवाया था। महाराष्ट्र में भगवान कृष्ण को विट्ठल या पंढरीनाथ के नाम से पुकारा जाता है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विट्ठल के साथ उनकी पत्नी रुक्मिणी की मूर्ति भी विराजमान है।

कहां है ये मंदिर?

यह पवित्र मंदिर महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में भीमा नदी (चंद्रभागा नदी) के किनारे बसे पंढरपुर शहर में स्थित है। मान्यता है कि, चंद्रभागा नदी में स्नान करने से भक्तों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

भक्त की प्रतीक्षा में खड़े रहें भगवान विठ्ठल

यह मंदिर भक्ति की उस महान शक्ति का गवाह है जहां भगवान भी भक्त की आज्ञा मानकर उसकी प्रतीक्षा करते हैं।  6वीं शताब्दी की यह प्रसिद्ध कथा है। भक्त पुंडलिक अपने माता-पिता की सेवा में पूर्ण रूप से लीन थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण रुक्मिणी सहित उनके दर्शन देने पहुंचे। उस समय पुंडलिक अपने सोए हुए पिता के पैर दबा रहे थे। 

भगवान ने आतिथ्य स्वीकार करने की इच्छा जताई, तो पुंडलिक ने विनम्रतापूर्वक कहा कि, वे ईंट पर खड़े होकर इंतजार करें। भगवान विट्ठल दोनों हाथ कमर पर रखकर ईंट पर खड़े हो गए। फिर जब पुंडलिक पिता की सेवा करने के बाद वापस आएं तो देखा की भगवान की प्रतिमा रुप में अवतरित हो गए थे।  

पंढरपुर कैसे बना तीर्थ?

स्थलपुंडलिक ने घर में ही विट्ठल भगवान की पूजा शुरू कर दी। कालांतर में यह स्थान पंढरपुर के नाम से प्रसिद्ध हो गया और महाराष्ट्र का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल बन गया।

पिछले लगभग 800 वर्षों से हर साल लाखों भक्त पंढरपुर वारी (पैदल यात्रा) में शामिल होते हैं। भक्त करीब 250 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर विट्ठल दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और समर्पण का जीवंत उदाहरण है, जहां भगवान स्वयं भक्त की प्रतीक्षा में खड़े हैं।

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