ओट्स के साइड इफेक्ट्स

क्या आप भी हर रोज खाते हैं ओट्स? तो पहले जान लिजिए इसके नुकसान

ओट्स कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं, लेकिन कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में यह नुकसान पहुंचा सकते हैं, जैसे कि सीलिएक रोग, एलर्जी, और डायबिटीज.

By : हेमा गुप्ता
क्या आप भी हर रोज खाते हैं ओट्स? तो पहले जान लिजिए इसके नुकसान

क्या आप भी हर रोज खाते हैं ओट्स? तो पहले जान लिजिए इसके नुकसान

Side Effects of oats: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी हर कोई पतले होने के चक्कर में नई-नई चीजें अपनी डाइट में शामिल करते हैं। इस वजह से आजकल लोग नाश्ते में ओट्स लेना ज्यादा पसंद करते हैं। ओट्स के कई फ्लेवर में आने लगे हैं।  

कुछ लोग दूध के साथ खाते तो कुछ लोग नमकीन ओट्स खाते हैं, गरम पानी में उबाल कर। वहीं दूध के साथ ओट्स खाना फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर हेल्दी ऑप्शन माना जाता है। लेकिन हर किसी के लिए यह पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में ओट्स खाना नुकसान पहुंचा सकता है।

ओट्स किन लोगों को कम या बिल्कुल नहीं खाना चाहिए?

सीलिएक डिजीज वाले लोगों को

ओट्स में खुद ग्लूटेन नहीं होता, लेकिन प्रोसेसिंग के दौरान गेहूं या अन्य ग्लूटेन वाले अनाजों से क्रॉस-कंटैमिनेशन हो सकता है। सीलिएक रोगी के लिए थोड़ी सी ग्लूटेन भी इम्यून रिएक्शन ट्रिगर कर सकती है, जिससे पेट दर्द, डायरिया, पोषक तत्वों का अवशोषण न होना और लंबे समय में गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

ओट्स से एलर्जी वाले लोग

हालांकि बहुत rare है, लेकिन कुछ लोगों को ओट्स में मौजूद प्रोटीन एवेनिन (Avenin) से एलर्जी हो सकती है। लक्षणों में शरीर पर लाल चकत्ते, खुजली, सांस लेने में तकलीफ, पेट में दर्द या सूजन शामिल हो सकते हैं।

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) या सेंसिटिव पाचन तंत्र

ओट्स में घुलनशील फाइबर (Beta-glucan) होता है जो कुछ लोगों में ब्लोटिंग, गैस, पेट फूलना और दर्द बढ़ा सकता है। अगर आपका पेट बहुत सेंसिटिव है तो ज्यादा मात्रा में ओट्स से परहेज करें। 
पहले थोड़ी मात्रा में खाएं, अगर इससे आपको कोई दिक्कत न हो तो आप उसकी मात्रा बढ़ा सकते हैं। 

डायबिटीज के मरीज

ओट्स का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है। लेकिन बहुत ज्यादा मात्रा में खाने से कुछ लोगों में ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकता है। इसलिए डायबिटीज वाले लोग सीमित मात्रा (आमतौर पर ½ कप पका हुआ) में ही खाएं और ब्लड शुगर मॉनिटर करें।

मिनरल डेफिशिएंसी वाले लोग

ओट्स में फाइटिक एसिड (Phytic acid) होता है, जो एंटी-न्यूट्रिएंट की तरह काम करता है। यह आयरन, कैल्शियम और जिंक जैसे मिनरल्स से बंध जाता है और शरीर में इनका अवशोषण कम कर देता है।

Note- अगर आपको पहले से इन मिनरल्स की कमी है तो ओट्स को भिगोकर (soaking) या sprouting करके खाएं, या मात्रा सीमित रखें।

NOTE- The information given has been taken from different websites, please take expert advice before adopting the information given.

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