हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के गुरुग्राम दौरे के दौरान सुरक्षा में चूक के मामले में पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने की कोशिश और प्रदर्शनकारियों के काले झंडे दिखाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए दो पुलिस उपायुक्तों (DCP) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
वहीं, सिविल लाइंस थाने के प्रभारी समेत 18 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
दो DCP से मांगा जवाब, 18 पर गिरी गाज
गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि VIP सुरक्षा में हुई चूक की जिम्मेदारी तय की जा रही है। इसी क्रम में DCP (पश्चिम) और DCP (क्राइम) को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
निलंबित पुलिसकर्मियों में सिविल लाइंस थाने के प्रभारी निरीक्षक बिजेंद्र कुमार, पश्चिम जिले के सुरक्षा प्रभारी ASI अमित और विभिन्न पदों पर तैनात 16 अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। इसके अलावा, एक इंटेलिजेंस अधिकारी समेत छह पुलिसकर्मियों के कामकाज की विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
शनिवार को पुलिस आयुक्त ने दो थाना प्रभारियों के तबादले के आदेश जारी किए। सेक्टर-50 थाने के प्रभारी निरीक्षक सुखबीर को सिविल लाइंस थाने की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि निरीक्षक इंदु बाला को सेक्टर-50 थाने का नया प्रभारी बनाया गया है।
काफिले के सामने पहुंचे प्रदर्शनकारी
पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार को मुख्यमंत्री के गुरुग्राम दौरे के दौरान कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए और अचानक मुख्यमंत्री के काफिले के सामने पहुंचकर उसे रोकने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति बिगड़ गई।
पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों के साथ हाथापाई की, सरकारी काम में बाधा डाली और VIP सुरक्षा व्यवस्था में व्यवधान पैदा किया। मामले में सिविल लाइंस थाने की पुलिस ने नौ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में सभी को जमानत मिल गई।
पुलिस के अनुसार, ASI चंद्रम की शिकायत पर FIR दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि काले झंडे दिखाने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ASI और क्विक रिस्पॉन्स टीम के अन्य सदस्यों के साथ हाथापाई की। इस दौरान ASI की वर्दी भी फाड़ दी गई। घायल ASI चंद्रम और हेड कांस्टेबल कर्मबीर का सेक्टर-10 स्थित सरकारी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया।
थाने में भी हुआ हंगामा
गिरफ्तार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जब पुलिस ने DCP के समक्ष पेश किया, तो सिविल लाइंस थाने में भी हंगामा हुआ। किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए थाने के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं समेत 12 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सभी आरोपियों को बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनका प्रदर्शन गुरुग्राम विश्वविद्यालय के प्रथम वर्ष के छात्रों के परीक्षा परिणाम जारी करने में कथित देरी के विरोध में था।
दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार पर साधा निशाना
इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा सरकार और गुरुग्राम प्रशासन पर निशाना साधा। शनिवार को गुरुग्राम में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतंत्र में नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।
हुड्डा ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज किए जाने और गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए इसे “लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ उठने वाली आवाजों को पुलिस और प्रशासन के जरिए दबाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी जनता और विपक्ष की बात सुनना है, न कि असहमति जताने वालों को जेल भेजना। हुड्डा ने यह भी कहा कि कांग्रेस इस कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगी और हर लोकतांत्रिक मंच पर अपनी आवाज उठाएगी।