पितृपक्ष के नियम

श्राद्ध का भोजन बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान, राई के तड़के को लेकर क्या है मान्यता

पितृपक्ष के दौरान, श्राद्ध के भोजन में राई का प्रयोग नहीं किया जाता, क्योंकि मान्यता है कि यह कौवों द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है।

By : सोनिया रायकवार
श्राद्ध का भोजन बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान, राई के तड़के को लेकर क्या है मान्यता

पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध और तर्पण से जुड़े कई नियम धार्मिक परंपराओं में बताए गए हैं। मान्यता है कि इस दौरान पितरों के लिए तैयार किया जाने वाला भोजन सात्विक, शुद्ध और श्रद्धा के साथ बनाया जाना चाहिए। इन्हीं मान्यताओं में भोजन में इस्तेमाल होने वाले मसालों और तड़के को लेकर भी कुछ बातें कही जाती हैं। खासतौर पर श्राद्ध के भोजन में राई यानी सरसों के दानों का तड़का लगाने से बचने की परंपरा कुछ जगहों पर मानी जाती है।

राई के तड़के को लेकर क्या है मान्यता?

लोक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में तैयार किए जाने वाले भोजन में राई का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि राई का तड़का लगे भोजन को जब कौवों के लिए रखा जाता है, तो वे उसे ग्रहण नहीं करते। धार्मिक परंपराओं में कौवे को पितरों का प्रतिनिधि या संदेशवाहक माना जाता है। इसलिए अगर कौवा भोजन नहीं खाता है, तो कुछ लोग इसे इस संकेत से जोड़ते हैं कि पितरों ने भोजन स्वीकार नहीं किया। हालांकि, यह धार्मिक और लोक मान्यता है। इसे वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

श्राद्ध के भोजन में किन चीजों से बचते हैं?

परंपराओं के अनुसार श्राद्ध का भोजन सात्विक रखा जाता है। कई परिवारों में प्याज, लहसुन, राई और कुछ अन्य मसालों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में श्राद्ध से जुड़े नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय मान्यता के अनुसार भोजन तैयार किया जाता है।

छौंक के लिए इन चीजों का करते हैं इस्तेमाल

जिन परिवारों में राई का इस्तेमाल नहीं किया जाता, वहां भोजन में छौंक लगाने के लिए जीरा, हींग और देसी घी का इस्तेमाल किया जाता है। इससे भोजन को सात्विक रखने की परंपरा मानी जाती है।

भोजन बनाते समय रखें साफ-सफाई का ध्यान

श्राद्ध का भोजन तैयार करते समय साफ-सफाई को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भोजन बनाने वाले व्यक्ति को स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर रसोई में प्रवेश करना चाहिए। भोजन तैयार करने से पहले रसोई और बर्तनों की अच्छी तरह सफाई करने की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है।

कौवे, गाय और कुत्ते के लिए निकाला जाता है भोजन

श्राद्ध की परंपराओं में भोजन का एक हिस्सा कौवे, गाय और कुत्ते के लिए निकालने की मान्यता है। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है। पितृपक्ष में इन सभी नियमों का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा और सम्मान के साथ पितरों का स्मरण करना माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग समुदायों और परिवारों में इन परंपराओं को निभाने का तरीका अलग हो सकता है।

संबंधित सामग्री

सबसे पहला श्राद्ध किसने किया था? भगवान राम को याद करने से पहले जान लें महाभारत की यह पौराणिक कथा!

सबसे पहला श्राद्ध किसने किया था? भगवान राम को याद करने से पहले जान लें महाभारत की यह पौराणिक कथा!

महाभारत के अनुसार, महर्षि निमि को श्राद्ध करने वाले पहले व्यक्ति के रूप में माना जाता है, जिसमें महर्षि अत्रि ने उन्हें पितृयज्ञ की विधि बताई थी।

शाम को घर में न लगाएं झाड़ू, पितृपक्ष में महिलाएं ध्यान रखें ये 6 बातें

शाम को घर में न लगाएं झाड़ू, पितृपक्ष में महिलाएं ध्यान रखें ये 6 बातें

पितृपक्ष के दौरान विभिन्न धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है, जैसे दीपक जलाना, श्राद्ध का भोजन न बनाना, और घर में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना।

पितृ पक्ष में बिना प्याज-लहसुन के बनाएं ये स्वादिष्ट सब्जियां, खाने वाले करेंगे तारीफ

पितृ पक्ष में बिना प्याज-लहसुन के बनाएं ये स्वादिष्ट सब्जियां, खाने वाले करेंगे तारीफ

पितृ पक्ष के दौरान, कई भारतीय परिवार प्याज और लहसुन के बिना सात्विक भोजन बनाते हैं। यहां कुछ स्वादिष्ट और आसान रेसिपीज हैं।

एक बेलपत्र, थोड़ा लाल चंदन और मन की बात… पितृ पक्ष में क्यों किया जाता है ये उपाय?

एक बेलपत्र, थोड़ा लाल चंदन और मन की बात… पितृ पक्ष में क्यों किया जाता है ये उपाय?

श्राद्ध पक्ष के दौरान बेलपत्र और लाल चंदन से शिव पूजा की विधि बताई गई है, जिससे पारिवारिक सुख-शांति और परेशानियों से राहत की कामना की जाती है।

वर्षों पुरानी इच्छा भी होगी पूरी? श्राद्धपक्ष में नंदीकेश्वर शिव का नाम लेकर करें यह उपाय

वर्षों पुरानी इच्छा भी होगी पूरी? श्राद्धपक्ष में नंदीकेश्वर शिव का नाम लेकर करें यह उपाय

श्राद्धपक्ष के दौरान नंदीकेश्वर शिव की पूजा करने की परंपरा है, जिससे व्यक्ति की मनोकामना पूरी होने की मान्यता है।

Advertisement

सेवा के 25 वर्ष 14 सितम्बर से  13 ऑक्टोबर