72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में कार्तिक आर्यन को फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के लिए बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिला। उन्होंने यह सम्मान अभिनेता ममूटी के साथ साझा किया, जिन्हें ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए अवॉर्ड दिया गया। वहीं, अभिनेता अनंत नाग को सिनेमा में पांच दशक से ज्यादा लंबे योगदान के लिए दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
दोनों कलाकारों की उपलब्धियां खास हैं, लेकिन इनके पीछे संघर्ष की लंबी कहानी भी है।
‘चंदू चैंपियन’ के लिए बदला लुक

कार्तिक आर्यन ने फिल्म में भारत के पहले पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाया था। इस भूमिका के लिए उन्होंने करीब 14 महीने तक लगातार ट्रेनिंग की। फिटनेस कोच और नेशनल लेवल बॉक्सर त्रिदेव पांडे के मुताबिक, ट्रेनिंग शुरू होने के समय कार्तिक का वजन करीब 90 किलो था। लक्ष्य था इसे 69 से 75 किलो के बीच लाना। इसके साथ उन्हें बॉक्सर की बॉडी लैंग्वेज और तकनीक पर भी काम करना था।
बॉक्सिंग की कड़ी ट्रेनिंग
फिल्म में बॉक्सिंग के वास्तविक सीन होने की वजह से कार्तिक को सिर्फ फिटनेस ही नहीं, बल्कि बॉक्सिंग की तकनीक भी सीखनी पड़ी। ट्रेनिंग में हैंड-आई कोऑर्डिनेशन और सामने वाले की हरकत को देखकर तेजी से प्रतिक्रिया देने पर खास ध्यान दिया गया। इस दौरान उन्हें कई बार पंच भी लगे। ट्रेनिंग के दौरान चेहरे और पेट पर चोट लगने के बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा।
12 अंडे और मिठाई से दूरी
कार्तिक की डाइट भी ट्रेनिंग का अहम हिस्सा थी। त्रिदेव पांडे के अनुसार, उनकी डाइट में रोजाना 12 अंडे शामिल थे। वह मांस नहीं खाते थे और करीब एक साल तक मिठाई से दूरी बनाए रखी। इस ट्रांसफॉर्मेशन का मकसद सिर्फ शरीर को बदलना नहीं, बल्कि पर्दे पर एक बॉक्सर की भूमिका को विश्वसनीय बनाना था।
70 हजार से शुरू हुआ सफर
कार्तिक आर्यन का फिल्मी सफर भी संघर्ष से भरा रहा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए मुंबई पहुंचे कार्तिक का सपना अभिनेता बनने का था। कॉलेज के साथ उन्होंने ऑडिशन देना शुरू किया। 2011 में उन्हें ‘प्यार का पंचनामा’ में काम मिला। इस फिल्म के लिए उन्हें करीब 70 हजार रुपये फीस मिली थी। फिल्म में उनका लंबा मोनोलॉग काफी चर्चित हुआ।
2018 में बदली तस्वीर
‘आकाशवाणी’ और ‘कांची’ जैसी फिल्मों के बाद कार्तिक को 2018 में ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ से बड़ा ब्रेक मिला। फिल्म की सफलता के बाद उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। इसके बाद ‘लुका छुपी’, ‘पति पत्नी और वो’ और 2022 की ‘भूल भुलैया 2’ जैसी फिल्मों ने उन्हें मुख्यधारा के लोकप्रिय अभिनेताओं में जगह दिलाई।
अनंत नाग का लंबा संघर्ष

दूसरी ओर, अनंत नाग का सफर भी आसान नहीं रहा। उन्होंने पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है। बचपन में कई स्कूलों और आश्रमों में रहने के बाद वे करीब 11 साल की उम्र में मुंबई आए। कन्नड़ से सीधे अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई करने में उन्हें परेशानी हुई और वे 10वीं की परीक्षा में फेल हो गए। बाद में उन्होंने 10वीं की पढ़ाई पूरी की और 11वीं तक शिक्षा हासिल की।
सेना में जाना चाहते थे

अनंत नाग के माता-पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर या इंजीनियर बनें। लेकिन पढ़ाई में लगातार परेशानियों के बीच उन्होंने सेना में जाने का फैसला किया। NCC और ऑक्जीलियरी कैडेट कॉर्प्स से जुड़े अनंत नाग को कम वजन के कारण सेना में मेडिकल आधार पर चयन नहीं मिला। खराब नजर की वजह से एयरफोर्स में भी उनका चयन नहीं हो सका।
थिएटर ने बदली जिंदगी
इसके बाद अनंत नाग थिएटर की ओर बढ़े। अगले पांच वर्षों में उन्होंने 50 से ज्यादा नाटकों में काम किया। कन्नड़, कोंकणी, मराठी और हिंदी थिएटर में अभिनय करते हुए उन्होंने अपनी पहचान बनाई। इसी दौरान सत्यदेव दुबे, गिरीश कर्नाड और अमोल पालेकर जैसे कलाकारों से उन्हें सीखने का मौका मिला।
फिल्मों से घर-घर पहचान
1973 में अनंत नाग ने कन्नड़ फिल्म ‘संकल्प’ से डेब्यू किया। इसी साल श्याम बेनेगल की ‘अंकुर’ से हिंदी सिनेमा में भी उनकी पहचान बनी। इसके बाद ‘निशांत’, ‘मंथन’ और ‘भूमिका’ जैसी फिल्मों में काम किया। टीवी सीरियल ‘मालगुडी डेज’ ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई।
दो पीढ़ियों की दो अलग कहानियां
एक तरफ कार्तिक आर्यन ने एक फिल्म के किरदार के लिए महीनों तक शरीर और अभिनय पर मेहनत की और नेशनल अवॉर्ड तक पहुंचे। दूसरी ओर अनंत नाग ने पढ़ाई की मुश्किलों, सेना में चयन न होने और शुरुआती अनिश्चितताओं के बाद थिएटर के रास्ते अपनी पहचान बनाई। कार्तिक का सफर जहां नए दौर के बॉलीवुड स्टार बनने तक पहुंचा, वहीं अनंत नाग ने पांच दशक से ज्यादा के करियर में कई भाषाओं के सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई।