देश के टैक्स सिस्टम में एक बार फिर बड़े बदलाव की तैयारी है। केंद्र सरकार जीएसटी व्यवस्था को और आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसे ‘GST 2.0’ के तौर पर देखा जा रहा है। जीएसटी काउंसिल की 7 अक्टूबर को होने वाली बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), रिफंड, रिटर्न फाइलिंग, रजिस्ट्रेशन और टैक्स विवादों से जुड़े कई प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है।
अगर प्रस्तावों पर सहमति बनती है, तो कारोबारियों और कंपनियों को अटके टैक्स क्रेडिट से राहत मिल सकती है।
ITC नियम आसान करने की तैयारी
जीएसटी काउंसिल की बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था को सरल बनाने पर चर्चा की जा सकती है। शुरुआती वर्षों में लगाए गए कुछ कड़े नियमों में बदलाव की संभावना है।
प्रस्तावित व्यवस्था में कागजी जांच के बजाय डेटा और तकनीक आधारित सिस्टम पर ज्यादा जोर दिया जा सकता है। ऑटोमेटेड और रिस्क-बेस्ड जांच के जरिए कारोबारियों के अनुपालन को आसान बनाने की कोशिश होगी।
इसका एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि कंपनियों का लंबे समय से फंसा टैक्स क्रेडिट कारोबार में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हो सके।
धारा 17(5) में भी बदलाव संभव
जीएसटी की धारा 17(5) के तहत फिलहाल कुछ खर्चों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलता। प्रस्तावों में इनमें से कुछ मामलों में राहत देने पर विचार किया जा सकता है।
इनमें कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, आउटडोर कैटरिंग, टेलीकॉम टावर और फैक्ट्रियों के बाहर बिछाई गई पाइपलाइन जैसे खर्च शामिल हो सकते हैं। मुफ्त सैंपल और एक्सपायर होकर नष्ट होने वाले सामान से जुड़े ITC नियमों में भी बदलाव पर विचार संभव है।
इसके अलावा 13 सीट तक की गाड़ियों, उनके इंश्योरेंस और मेंटेनेंस तथा वाहन लीज पर लेने से जुड़े खर्चों पर भी ITC की अनुमति देने का प्रस्ताव बताया जा रहा है।
सप्लायर की गलती पर खरीदार को राहत
जीएसटी व्यवस्था में सप्लायर के टैक्स डिफॉल्ट को लेकर खरीदारों को होने वाली परेशानी भी बैठक का अहम मुद्दा हो सकती है।
प्रस्ताव के मुताबिक, अगर खरीदार ने वास्तविक लेनदेन किया है और बाकी शर्तें पूरी हैं, तो सिर्फ सप्लायर की गलती के कारण उसका ITC नहीं रोका जाए। टैक्स की वसूली उस सप्लायर से की जा सकती है, जिसने टैक्स जमा नहीं किया है।
इस बदलाव से ईमानदारी से कारोबार करने वाले खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
छोटे मामलों में नोटिस पर रोक
छोटे कारोबारियों को मामूली टैक्स संबंधी गड़बड़ियों पर मिलने वाले नोटिस को कम करने का भी प्रस्ताव है। जानकारी के मुताबिक, 10 हजार रुपये से कम के मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी करने पर रोक लगाने पर विचार किया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित बदलाव लंबित मामलों पर भी लागू करने की संभावना है। इससे छोटे कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम हो सकता है।
IT सेक्टर को भी मिल सकती है राहत
आईटी और आईटीईएस कंपनियों के लिए भी कुछ अहम बदलाव प्रस्तावित बताए जा रहे हैं। विदेशी ब्रांच ऑफिस को दी जाने वाली कुछ सेवाओं को एक्सपोर्ट का दर्जा देने पर विचार हो सकता है। इससे संबंधित कंपनियों को ITC का लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है।
छोटे कारोबारियों के लिए रिटर्न आसान
छोटे कारोबारियों के लिए रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव भी सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, 5 करोड़ रुपये तक सालाना टर्नओवर वाले ऐसे कारोबारी, जो केवल अनरजिस्टर्ड ग्राहकों को सामान बेचते हैं, उनके लिए साल में सिर्फ एक बार रिटर्न भरने और हर तिमाही टैक्स जमा करने जैसी व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, इन सभी प्रस्तावों पर अंतिम फैसला जीएसटी काउंसिल की बैठक में चर्चा और सहमति के बाद ही होगा।