खतरे की घंटी: जलवायु प्रदर्शन में भारत 13 पायदान नीचे

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खतरे की घंटी: जलवायु प्रदर्शन में भारत 13 पायदान नीचे

खतरे की घंटी जलवायु प्रदर्शन में भारत 13 पायदान नीचे

CCPI 2026 की रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ

ब्राजील के बेलेम में चल रहे COP30 सम्मेलन में इस हफ्ते एक रिपोर्ट ने सबका ध्यान खींचा। जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (CCPI 2026) में भारत 13 स्थान फिसलकर 23वें नंबर पर आ गया है। यह गिरावट सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उस दबाव का संकेत है जिसके बीच भारत को अपनी ऊर्जा नीति, कोयले पर निर्भरता और जलवायु प्रतिबद्धताओं का संतुलन साधना है।

भारत की रैंकिंग क्यों गिरी?

रिपोर्ट साफ कहती है भारत की सबसे बड़ी कमजोरी कोयले के उपयोग से बाहर निकलने की कोई निश्चित समय-सीमा न होना है। नए कोयला ब्लॉकों की नीलामी जारी है और ऊर्जा ढांचा अब भी कोयले पर टिके रहने का संकेत देता है। इसी वजह से भारत पिछली बार के उच्च प्रदर्शनकर्ता से फिसलकर मध्यम श्रेणी में आ गया। Read More:- MP Weather: MP में कड़ाके की ठंड प्रदेश के 21 जिलों में कोल्ड वेव अलर्ट रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल, गैस और कोयला उत्पादकों में शुमार है। दबाव यह भी है कि कई देशों ने न केवल महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य तय किए हैं, बल्कि कोयला-निकास के लिए तारीखें भी घोषित कर दी हैं।

दूसरे देश क्या कर रहे हैं?

इस बार कोई भी देश शीर्ष 3 में जगह नहीं बना पाया, यह दर्शाता है कि दुनिया अब भी जरूरी गति से आगे नहीं बढ़ रही। डेनमार्क चौथे नंबर पर है, जबकि मोरक्को और ब्रिटेन उसके बाद आते हैं। दूसरी ओर, सऊदी अरब सूची के सबसे नीचे है। अमेरिका और ईरान भी निचले पायदानों में शामिल हैं।

रिपोर्ट भारत की कुछ मजबूत पहलें भी दर्ज करती है

  • ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों में लंबा अनुभव
  • नवीकरणीय ऊर्जा की तेजी से बढ़ती क्षमता
  • सोलर नीलामी में दुनिया के सबसे कम टैरिफ
  • कार्बन मार्केट फ्रेमवर्क और ग्रीन फाइनेंस पर काम
लेकिन इन सकारात्मक संकेतों के बीच कई बड़े अंतर भी साफ हुए। सबसे अहम कमी कोयले पर निर्भरता। कोई ठोस निकास योजना नहीं, सब्सिडी अब भी जीवाश्म ईंधन की ओर झुकी हुई, और कोयला उत्पादन बढ़ाने की योजनाएं इस प्रगति को धुंधला कर देती हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि बड़े पैमाने पर नवीकरणीय परियोजनाओं ने कई जगह जमीन विवाद, विस्थापन और पानी की कमी जैसे तनाव भी पैदा किए। कई जगह पर्यावरण और मानवाधिकार संबंधी चिंताएं सामने आईं, जिससे विकास का मॉडल लोगों से दूर और ऊपर से थोपे जाने जैसा दिखा।

भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएं

भारत ने 2030 तक अपनी बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से करने और उत्सर्जन-तीव्रता में 45 प्रतिशत कमी की प्रतिबद्धता दोहराई है। पर 2070 का नेट-जीरो लक्ष्य विशेषज्ञों के मुताबिक अभी भी 1.5°C तापमान सीमा के अनुकूल नहीं है।

रिपोर्ट के सुझाव

  • कोयला चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की तारीख तय की जाए।
  • जीवाश्म ईंधन सब्सिडी नवीकरणीय ऊर्जा के स्थानीय, समुदाय आधारित मॉडल की तरफ मोड़ी जाए।
  • नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सामाजिक और पर्यावरणीय सुरक्षा बढ़ाई जाए।
  • परिवहन, उद्योग और भवनों के लिए 2035 और 2040 तक स्पष्ट रोडमैप बने।
  • छोटे किसानों, महिलाओं और जलवायु-संवेदनशील समुदायों को प्राथमिकता मिले।
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