अजमेर के सेवन वंडर्स पार्क पर चला बुलडोजर: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तोड़फोड़ शुरू

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अजमेर के सेवन वंडर्स पार्क पर चला बुलडोजर: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तोड़फोड़ शुरू

अजमेर के सेवन वंडर्स पार्क पर चला बुलडोजर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तोड़फोड़ शुरू

Ajmer Seven Wonders Demolition: अजमेर, की आनासागर झील के किनारे बने सेवन वंडर्स पार्क अब इतिहास बनने की कगार पर है। आज, 12 सितंबर 2025 को, सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद इस पार्क को तोड़ने की कार्रवाई शुरू हो गई है। छह महीने पहले कोर्ट ने इसे हटाने का निर्देश दिया था, लेकिन प्रशासन की सुस्ती के कारण केवल एक प्रतिमा को नीचे रखा गया था। अब, जिला प्रशासन और अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) की टीम ने बुलडोजर चला दिया है।

[caption id="attachment_104645" align="alignnone" width="476"]अजमेर के सेवन वंडर्स पार्क पर चला बुलडोजर अजमेर के सेवन वंडर्स पार्क पर चला बुलडोजर[/caption]

सेवन वंडर्स पार्क

सेवन वंडर्स पार्क अजमेर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 11.64 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था। यह आनासागर झील के किनारे 2.5 बीघा से अधिक क्षेत्र में फैला एक आकर्षक पर्यटन स्थल था, जहां दुनिया के सात अजूबों की प्रतिकृतियां स्थापित की गई थीं। ताजमहल, ग्रेट वॉल ऑफ चाइना, स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी, रोमन कोलोसियम, पेट्रा, ईजिप्ट के पिरामिड और चिचेन इट्जा जैसी संरचनाओं ने इसे पर्यटकों के लिए लोकप्रिय बना दिया। पार्क में फव्वारे, लाइटिंग और हरियाली का भी इंतजाम था, जो शाम के समय रंग-बिरंगे लाइट शो से जगमगा उठता था। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह पार्क न केवल मनोरंजन का केंद्र था, बल्कि युवाओं और परिवारों के लिए एक पिकनिक स्पॉट भी बन गया था। [caption id="attachment_104646" align="alignnone" width="521"]टलैंड पर हुए इस निर्माण को तोड़ने के लिए एक्सपर्ट की भी मदद ली जा रही है। टलैंड पर हुए इस निर्माण को तोड़ने के लिए एक्सपर्ट की भी मदद ली जा रही है।[/caption]

Ajmer Seven Wonders Demolition: पर्यावरण को नुकसान

हालांकि, यह निर्माण 2020-2022 के बीच पूरा हुआ, जब स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अजमेर को विकसित करने का सपना बुना जा रहा था। लेकिन जल्द ही यह पर्यावरणविदों की नजर में आ गया। आनासागर झील राजस्थान की प्राचीनतम कृत्रिम झीलों में से एक है, जो 12वीं शताब्दी में बनाई गई थी। इसकी वेटलैंड (आर्द्र भूमि) क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण ने पारिस्थितिक संतुलन को खतरे में डाल दिया। झील का जल स्तर घट रहा था, प्रदूषण बढ़ रहा था और पक्षियों का आवास नष्ट हो रहा था। पार्क के निर्माण में मास्टर प्लान की अनदेखी की गई, जो वेटलैंड को संरक्षित रखने का प्रावधान करता है। [caption id="attachment_104647" align="alignnone" width="560"]स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इस प्रोजेक्ट को बनाया गया था। निर्माण के दौरान से ही ये प्रोजेक्ट विवादों में रहा है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इस प्रोजेक्ट को बनाया गया था। निर्माण के दौरान से ही ये प्रोजेक्ट विवादों में रहा है।[/caption]

लागत और फंडिंग का विवाद

11.64 करोड़ रुपये की यह लागत केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन से आई थी। लेकिन सवाल उठा कि इतने पैसे खर्च करने के बाद यह पार्क इतनी जल्दी क्यों तोड़ा जा रहा है? स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, निर्माण में गुणवत्ता की कमी थी। प्रतिमाएं फाइबर ग्लास से बनी थीं, जो मौसम की मार सहन नहीं कर पाईं। इसके अलावा, पार्क के रखरखाव पर सालाना करोड़ों रुपये खर्च हो रहे थे, लेकिन आय न्यूनतम थी। टिकट बिक्री से महज कुछ लाख रुपये ही आते थे, जबकि बिजली और सफाई पर ही 50 लाख से अधिक खर्च हो जाता था। यह प्रोजेक्ट IPS अधिकारियों के जिम्मे था, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी। स्मार्ट सिटी की सीईओ और नगर निगम कमिश्नर पर उंगलियां उठीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

अवैध निर्माण पर पहला प्रहार

सबसे पहले 11 मार्च 2023 को बीजेपी के पूर्व पार्षद अशोक मलिक ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भोपाल बेंच में रिट याचिका दायर की। उन्होंने आनासागर झील के वेटलैंड क्षेत्र में सेवन वंडर्स, पटेल स्टेडियम, गांधी स्मृति उद्यान और फूड कोर्ट जैसे निर्माणों को अवैध बताया। याचिका में कहा गया कि ये निर्माण झील के मूल स्वरूप को नष्ट कर रहे हैं, जो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का उल्लंघन है। NGT ने 11 अगस्त 2023 को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने इन्हें अतिक्रमण माना और तुरंत ध्वस्त करने का आदेश दिया। NGT ने कहा कि वेटलैंड में कोई भी निर्माण अवैध है, चाहे वह कितना ही सुंदर क्यों न हो। झील के चारों ओर पाथवे, सेवन वंडर्स और अन्य संरचनाओं को तोड़ने के निर्देश दिए गए। अदालत ने एक महीने की समयसीमा तय की, अन्यथा जुर्माना लगाने की चेतावनी दी। NGT के अनुसार, ये निर्माण झील के जल संचयन को प्रभावित कर रहे थे और बाढ़ के खतरे को बढ़ा रहे थे। राजस्थान सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन NGT ने पालन न करने पर 3 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया। [caption id="attachment_104649" align="alignnone" width="561"]कार्रवाई शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई थी। कार्रवाई शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई थी।[/caption]

राज्य सरकार की अपील और देरी

राज्य सरकार ने NGT के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सरकार का तर्क था कि सेवन वंडर्स पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है और इसे शिफ्ट किया जा सकता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआत में कोई राहत नहीं दी। इस देरी के कारण कार्रवाई रुकी रही। मार्च 2025 तक केवल स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी की प्रतिमा को हटाकर नीचे रखा गया, जो एक आधा-अधूरा प्रयास था।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में मामला 25 फरवरी 2025 को आया। स्मार्ट सिटी की सीईओ और नगर निगम कमिश्नर ने एफिडेविट पेश किया, जिसमें देरी के कारण बताए गए। लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। जस्टिसों ने नाराजगी जताते हुए कहा, "निर्माण चाहे सुंदर हो, लेकिन नियमों का उल्लंघन हुआ है तो तोड़ना पड़ेगा। जल निकायों और आर्द्र भूमि पर अतिक्रमण करके शहर कैसे स्मार्ट बन सकते हैं?" कोर्ट ने मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया और आदेश दिया कि NGT के निर्देशों का पालन हो।

Ajmer Seven Wonders Demolition: 6 महीने का समय

इस सुनवाई में कोर्ट ने साफ कहा कि वेटलैंड नियमों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सेवन वंडर्स को छह महीने (सितंबर 2025 तक) में हटाने का समय दिया गया। साथ ही, फूड कोर्ट को 7 अप्रैल 2025 तक तोड़ने का आदेश था। कोर्ट ने NEERI (नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) से रिपोर्ट मांगी, जिसमें वेटलैंड की बहाली की योजना शामिल हो।

टेंडर से बुलडोजर तक

17 मार्च 2025 की सुनवाई में कोर्ट ने जिला प्रशासन से हलफनामा मांगा। प्रशासन ने कहा कि 17 सितंबर तक पूरा काम हो जाएगा। लेकिन अप्रैल 2025 में कोर्ट ने 30 दिन की अल्टीमेटम दी, या तो तोड़ो या शिफ्ट करो। 7 अप्रैल को फूड कोर्ट तोड़ दिया गया, जो 7 करोड़ की लागत से बना था। अब सितंबर में सेवन वंडर्स पर फोकस है। कोर्ट ने कहा कि जितना क्षेत्र नष्ट हुआ है, उतना बहाल करना होगा।

ADA का टेंडर विवाद

अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) ने तोड़फोड़ के लिए टेंडर जारी किए। लेकिन केवल एक कंपनी ने बोली लगाई, जिसके कारण उन्हें निरस्त करना पड़ा। नया टेंडर प्रक्रिया में है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दबाव में प्रशासन ने खुद कार्रवाई शुरू कर दी। आज सुबह ADA और नगर निगम की टीम ने पार्क में ताले लगाए और स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी सहित प्रतिमाओं को तोड़ना शुरू किया। पीला पंजा चला तो धूल का गुबार उठ गया। जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया कि 17 सितंबर तक पूरा पार्क हट जाएगा। लेकिन स्थानीय लोग चिंतित हैं कि क्या शिफ्टिंग संभव है? सरकार वैशाली नगर या अन्य जगह पर शिफ्ट करने की योजना बना रही है, लेकिन लागत दोगुनी हो सकती है।

मीडिया को अंदर जाने से रोका

12 सितंबर को सुबह 7 बजे कार्रवाई शुरू हुई। ADA की टीम ने मीडिया को अंदर जाने से रोका। वीडियो फुटेज में दिखा कि बुलडोजर ने पहले फव्वारों को निशाना बनाया। स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी को नीचे गिरा दिया गया। यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया, नारे लगाए "अजमेर बचाओ, भ्रष्टाचारी भगाओ"। पुलिस ने बैरिकेडिंग की। कार्रवाई शाम तक चलेगी, और कल से तेजी आएगी।

सेवन वंडर्स में कब क्या हुआ

[caption id="attachment_104648" align="alignnone" width="451"]सेवन वंडर्स में कब क्या हुआ सेवन वंडर्स में कब क्या हुआ[/caption]

विवाद और राजनीतिक रंग

Ajmer Seven Wonders Demolition: सेवन वंडर्स तोड़ने के बाद यूथ कांग्रेस ने "अजमेर बचाओ" आंदोलन शुरू किया। उनका आरोप है कि 100 करोड़ से अधिक की लागत व्यर्थ गई। पूर्व सीएम अशोक गहलोत के कार्यकाल में यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ, लेकिन वर्तमान भजनलाल सरकार पर पालन न करने का इल्जाम। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही से पर्यावरण और पैसा दोनों बर्बाद हुए।

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