‘सूरज-चांद छोड़कर सब कुछ देने के वादे’: मुफ्त की रेवड़ी पर सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई से इनकार

supreme-court-freebies-pil-election-promises-hearing

‘सूरज-चांद छोड़कर सब कुछ देने के वादे’: मुफ्त की रेवड़ी पर सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई से इनकार

‘सूरज-चांद छोड़कर सब कुछ देने के वादे’ मुफ्त की रेवड़ी पर सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई से इनकार

Supreme Court Defers Hearing on Freebies PIL: नई दिल्ली: चुनाव आते ही मुफ्त योजनाओं और बड़े-बड़े वादों की राजनीति एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गई है। चुनावों में फ्रीबीज यानी मुफ्त सुविधाएं देने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि मामला बेहद गंभीर है और जनहित से जुड़ा हुआ है।

Supreme Court Defers Hearing on Freebies PIL: याचिकाकर्ता का आरोप

भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने अपनी लंबित याचिका का जिक्र करते हुए कहा कि देश के पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और राजनीतिक दल “सूरज और चांद छोड़कर सब कुछ” देने के वादे कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस तरह के वादे भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आते हैं और लोकतंत्र की मूल भावना को नुकसान पहुंचाते हैं।

Supreme Court Defers Hearing on Freebies PIL: सुप्रीम कोर्ट का रुख

इस मामले पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण है और व्यापक जनहित से जुड़ा है। उन्होंने संकेत दिया कि इस पर तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सुनवाई होनी चाहिए। हालांकि कोर्ट ने फिलहाल कोई तारीख तय नहीं की और कहा कि फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में इस मामले का फिर से उल्लेख किया जा सकता है। Also Read-वर्ल्ड हिजाब डे पोस्ट पर मेयर ममदानी घिरे: ईरान की महिलाओं से तुलना ने बढ़ाया विवाद 

देश पर बढ़ते कर्ज का हवाला

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत का ध्यान भारत पर बढ़ते कर्ज की ओर भी दिलाया गया। बताया गया कि देश पर इस समय लगभग ₹250 लाख करोड़ का कर्ज है। इस पर सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह आंशिक रूप से नीतिगत निर्णय का विषय हो सकता है, लेकिन यह भी देखना जरूरी है कि क्या राज्य के राजस्व का एक हिस्सा केवल विकास कार्यों के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

मुफ्त सुविधाएं बनाम संवैधानिक जिम्मेदारी

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी साफ किया कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मुफ्त सुविधाएं देना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी के दायरे में आता है। सीजेआई ने कहा कि ऐसे मामलों में राज्य अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा होता है। वरिष्ठ वकील शादान फरासत ने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ राज्य महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देते हैं। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य की संपदा का वितरण इस तरह होना चाहिए कि उसका इस्तेमाल कल्याणकारी योजनाओं में सही तरीके से हो।

संबंधित सामग्री

कोयला गैसीकरण को मिली नई गति, केंद्र से मंजूरी, CM डॉ यादव ने जताया आभार

राज्य

कोयला गैसीकरण को मिली नई गति, केंद्र से मंजूरी, CM डॉ यादव ने जताया आभार

केंद्र सरकार ने कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण के लिए 37.5 हजार करोड़ रुपये के परिव्यय की योजना को मंजूरी दी, जिससे 50 हजार रोजगार सृजित होंगे।

मोदी सरकार ने 2026-27 के लिए खरीफ फसलों के MSP में की वृद्धि,  CM डॉ यादव ने जताया आभार

राज्य

मोदी सरकार ने 2026-27 के लिए खरीफ फसलों के MSP में की वृद्धि, CM डॉ यादव ने जताया आभार

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 14 खरीफ फसलों के मिनिमम सपोर्ट प्राइस में वृद्धि को मंजूरी दी।

अहमदाबाद में ज्वैलरी शोरूम की सेल्सगर्ल ने पार किये 1.66 करोड़ के गहने, हुई फरार; CCTV में कैद पूरी साजिश

जुर्म गाथा

अहमदाबाद में ज्वैलरी शोरूम की सेल्सगर्ल ने पार किये 1.66 करोड़ के गहने, हुई फरार; CCTV में कैद पूरी साजिश

अहमदाबाद में एक ज्वैलरी शोरूम से सेल्सगर्ल ने 1.66 करोड़ रुपये के सोने के आभूषण चुराकर फरार हो गई। पुलिस ने जांच तेज कर दी है।

मंडी में हिमाचल CM सुक्खू ने किया सियासी प्रहार, बोले- ‘अब सरकार हमारी, फैसले भी हमारे’

राज्य

मंडी में हिमाचल CM सुक्खू ने किया सियासी प्रहार, बोले- ‘अब सरकार हमारी, फैसले भी हमारे’

हिमाचल प्रदेश के सीएम सुक्खू ने मंडी में चुनावी सभा की, जहां उन्होंने जयराम ठाकुर की पिछली सरकार पर हमला बोला और विकास कार्यों के वादे किए।

झारखण्ड के पूर्व मंत्री माधवलाल सिंह का निधन, CM सोरेन ने जताया दुख; करार दिया ‘अपूरणीय क्षति’

राज्य

झारखण्ड के पूर्व मंत्री माधवलाल सिंह का निधन, CM सोरेन ने जताया दुख; करार दिया ‘अपूरणीय क्षति’

झारखंड के वरिष्ठ नेता माधवलाल सिंह का निधन हो गया। वह गोमिया से चार बार विधायक और बिहार व झारखंड में मंत्री रहे।