मासूम की जान बचाई

खेलते-खेलते निगला पत्थर, एक महीने तक सांस लेने में जूझता रहा मासूम; भोपाल के डॉक्टरों ने बचाई जान

खेलते समय निगले गए पत्थर के कारण एक महीने तक सांस की तकलीफ से जूझते रहे बच्चे की जान भोपाल के डॉक्टरों ने बचाई। बिना सर्जरी के आधुनिक तकनीक से किया गया उपचार।

By : नरेंद्र सिंह
खेलते-खेलते निगला पत्थर, एक महीने तक सांस लेने में जूझता रहा मासूम; भोपाल के डॉक्टरों ने बचाई जान

भोपाल के चिकित्सकों ने एक जटिल और जीवनरक्षक प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए साढ़े चार वर्षीय मासूम की जान बचा ली। खेल-खेल में निगला गया करीब 1 से 1.5 सेंटीमीटर का पत्थर बच्चे की श्वास नली में गहराई तक फंस गया था, जिसके कारण वह पिछले एक महीने से लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी और बार-बार छाती के संक्रमण से जूझ रहा था। चिकित्सकों ने बिना बड़ी सर्जरी के आधुनिक तकनीक की मदद से पत्थर निकालकर बच्चे को राहत दिलाई।

एक महीने तक नहीं चल पाया बीमारी का पता

जानकारी के अनुसार, टीकमगढ़ निवासी मासूम की तबीयत लंबे समय से खराब थी। उसे लगातार खांसी और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। स्थानीय स्तर पर इलाज भी कराया गया, लेकिन समस्या की वास्तविक वजह सामने नहीं आ सकी। हालत में सुधार नहीं होने पर परिजन उसे उपचार के लिए भोपाल लेकर पहुंचे।

जांच में सामने आया चौंकाने वाला कारण

भोपाल में एक्स-रे जांच के दौरान चिकित्सकों को श्वास नली में किसी बाहरी वस्तु के फंसे होने की आशंका हुई। इसके बाद ब्रोंकोस्कोपी जांच की गई, जिसमें पता चला कि काले रंग का पत्थर बच्चे के बाएं फेफड़े की मुख्य श्वासनली (लेफ्ट ब्रोंकस) के अंतिम हिस्से में फंसा हुआ है।चिकित्सकों के अनुसार, पत्थर काफी अंदर तक पहुंच चुका था, जिससे सांस लेने का मार्ग प्रभावित हो रहा था और बार-बार संक्रमण की समस्या उत्पन्न हो रही थी।

बिना सर्जरी के निकाला गया पत्थर

पारुल हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. प्रखर अग्रवाल और उनकी सहयोगी डॉ. कीर्ति ने जनरल एनेस्थीसिया के तहत रिजिड ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया अपनाई। इस तकनीक की मदद से श्वास नली के गहरे हिस्से में फंसे पत्थर को बेहद सावधानी से बाहर निकाला गया।डॉक्टरों ने बताया कि यह तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया थी, क्योंकि पत्थर श्वासनली के अंतिम हिस्से में फंसा हुआ था। सफल प्रक्रिया के बाद बच्चे की श्वास नली पूरी तरह खुल गई और उसे तत्काल राहत मिली।

समय पर इलाज नहीं मिलता तो हो सकती थी गंभीर स्थिति

विशेषज्ञों के मुताबिक यदि समय रहते सही जांच और उपचार नहीं मिलता, तो बच्चे को फेफड़ों में गंभीर संक्रमण, सूजन या सांस रुकने जैसी जानलेवा समस्याओं का सामना करना पड़ सकता था।डॉ. प्रखर अग्रवाल ने अभिभावकों को सलाह दी कि छोटे बच्चों की गतिविधियों पर विशेष ध्यान रखें। यदि किसी बच्चे को लगातार खांसी, सांस लेने में कठिनाई, सीटी जैसी आवाज या बार-बार छाती में संक्रमण की शिकायत हो, तो इसे सामान्य बीमारी मानकर नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराएं।

बच्चों में ऐसे मामलों को हल्के में न लें

चिकित्सकों का कहना है कि छोटे बच्चे अक्सर खेल-खेल में कंकड़, खिलौनों के छोटे हिस्से, सिक्के या अन्य वस्तुएं मुंह में डाल लेते हैं। कई बार ये वस्तुएं भोजन नली की बजाय श्वास नली में पहुंच जाती हैं, जो गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। ऐसे मामलों में समय पर पहचान और विशेषज्ञ उपचार जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संबंधित सामग्री

भोपाल में शिक्षक भर्ती पदवृद्धि को लेकर आंदोलन तेज, नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन प्रदर्शन

भोपाल में शिक्षक भर्ती पदवृद्धि को लेकर आंदोलन तेज, नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन प्रदर्शन

भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक भर्ती के लिए अधिक पदों की मांग करते हुए अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी है।

MP में रक्षाबंधन से पहले CNG महंगी, भोपाल में ₹1.50 बढ़े दाम,97.50 रुपए किलो हुआ रेट, अवंतिका-गेल पहले ही बढ़ा चुके

MP में रक्षाबंधन से पहले CNG महंगी, भोपाल में ₹1.50 बढ़े दाम,97.50 रुपए किलो हुआ रेट, अवंतिका-गेल पहले ही बढ़ा चुके

मध्य प्रदेश में रक्षाबंधन से पहले CNG की कीमतें बढ़ीं, भोपाल में नया रेट ₹97.50 प्रति किलो हुआ। इससे वाहन चालकों पर आर्थिक असर पड़ सकता है।

भोपाल में बढ़ी ई-बसों की रफ्तार, 24 अगस्त से 30 बसें करेंगी शहर की सवारी आसान,10 नई ई-बसें जुड़ेंगी

भोपाल में बढ़ी ई-बसों की रफ्तार, 24 अगस्त से 30 बसें करेंगी शहर की सवारी आसान,10 नई ई-बसें जुड़ेंगी

भोपाल में ई-बसों की संख्या 20 से बढ़कर 30 होने से सार्वजनिक परिवहन की सुविधा में बढ़ोतरी होगी, यात्रियों को कम अंतराल में सेवा मिलेगी।

भोपाल हत्याकांड: तीन बार तालाब खंगाला, फिर भी नहीं मिले किशोर के अंग, 12 लाख के ट्रांजैक्शन की भी जांच

भोपाल हत्याकांड: तीन बार तालाब खंगाला, फिर भी नहीं मिले किशोर के अंग, 12 लाख के ट्रांजैक्शन की भी जांच

भोपाल में 17 वर्षीय किशोर की हत्या के मामले में पुलिस आर्थिक लालच के एंगल से जांच कर रही है। आरोपियों के बैंक खाते और डिजिटल गतिविधियां खंगाली जा रही हैं।

एसएनसीयू हादसा: सीएम डॉ. यादव ने व्यक्त किया दुख, मृतक बच्ची के परिजन को 4 लाख की सहायता 

एसएनसीयू हादसा: सीएम डॉ. यादव ने व्यक्त किया दुख, मृतक बच्ची के परिजन को 4 लाख की सहायता 

छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के एसएनसीयू में आग लगने के कारण तीन बच्चे झुलस गए, एक की मौत हुई। सीएम यादव ने मृतक के परिजन को 4 लाख की सहायता दी।

Advertisement

Uk Add यूसीसी-समानता द्वारा समरसता 01 on 23 Aug 2026