भोपाल में भारी जलभराव

भोपाल में तेज बारिश से सिस्टम की खुली पोल, सड़कों से लेकर हॉस्टल तक जलभराव

भोपाल में हुई तेज बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में भारी जलभराव हुआ, जिससे स्थानीय निवासियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई।

भोपाल में तेज बारिश से सिस्टम की खुली पोल, सड़कों से लेकर हॉस्टल तक जलभराव

भोपाल में हुई तेज बारिश ने नगर निगम और बिजली व्यवस्था के दावों की पोल खोल दी। बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ। शिवनगर, सुंदरनगर और पुराने भोपाल के कई हिस्सों में सड़कों पर करीब एक फीट तक पानी भर गया, जिससे इलाके तालाब जैसे नजर आने लगे।

तेज बारिश में व्यवस्था पूरी तरह फेल

बारिश का असर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 100 से ज्यादा इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई। कई जगह घंटों तक बिजली गुल रही, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि नालों की समय पर सफाई और बेहतर जल निकासी व्यवस्था के दावे हर साल किए जाते हैं, लेकिन पहली ही तेज बारिश में व्यवस्था पूरी तरह फेल हो जाती है।

ड्रेनेज सिस्टम पर सवाल उठने लगे

सबसे ज्यादा चर्चा गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के सी-ब्लॉक बॉयज हॉस्टल की स्थिति को लेकर हो रही है। हाल ही में नवीनीकरण के बाद भी हॉस्टल के ग्राउंड फ्लोर पर पानी भर गया। बताया जा रहा है कि लगभग 10 से 15 कमरों और कॉरिडोर में जलभराव हो गया, जिससे करीब 70 से 80 छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और ड्रेनेज सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं।

आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिला

शनिवार रात से शुरू हुई बारिश रविवार सुबह तक रुक-रुक कर जारी रही। सबसे ज्यादा असर पुराने शहर के वार्ड-73 और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिला, जहां शिवाजी गली, मस्जिद वाली गली और अन्य मोहल्लों में सड़कें पूरी तरह पानी में डूब गईं। कई घरों तक पानी पहुंच गया, जिससे लोगों को घरों से निकलना मुश्किल हो गया।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल बारिश से पहले तैयारियों के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविकता में स्थिति जस की तस बनी रहती है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब शुरुआती बारिश में ही यह हाल है, तो पूरे मानसून सीजन में शहर की स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।

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